ट्रम्प के नए टैरिफ पर फिर से अदालत में चुनौती, कानूनी जंग तेज
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व टैरिफ को खारिज किए सात महीने बाद, ट्रम्प प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 86 देशों पर नए शुल्क लागू किए। न्यूयॉर्क के अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड कोर्ट में छोटे व्यापारियों और कई राज्यों ने इन टैरिफ को बिना ठोस सबूत के राजनीतिक कदम कहा, जिससे सुनवाई में तीव्र प्रतिरोध दिख रहा है। अगर प्रशासन को हार का सामना करना पड़ा तो उसे वसूले गए राजस्व को लौटाना पड़ सकता है।

सौजन्य से:- Jagran
ट्रंप के नए टैरिफ को फिर से कोर्ट में चुनौती, कानूनी मोर्चे पर बढ़ा संघर्ष
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व के टैरिफ को खारिज किए जाने के सात महीने बाद, ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 ...और पढ़ें
HighLights
- न्यायिक शिकंजे में ट्रंप की व्यापारिक नीतियां
- ट्रेड एक्ट की धारा 301 बनी विवाद की जड़
डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक आयात पर लगाए गए नए शुल्कों (टैरिफ) को लेकर कानूनी लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व के टैरिफ को खारिज किए जाने के सात महीने बाद, ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 86 देशों पर नए शुल्क लगा दिए हैं।
ट्रंप का तर्क है कि ये देश 'जबरन श्रम' को रोकने में नाकाम रहे हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ है। हालांकि, आलोचकों और छोटे व्यापारियों ने इस कदम को राजनीतिक और कानूनी रूप से मनमाना करार दिया है।
छोटे व्यवसायों व राज्यों द्वारा व्यापक कानूनी विरोध
न्यूयार्क स्थित इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। लिबर्टी जस्टिस सेंटर की चेयर सारा अल्ब्रेक्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "जब तक प्रशासन कानूनों का दुरुपयोग करता रहेगा, हम उन्हें चुनौती देते रहेंगे।"
छोटे व्यवसायों और विभिन्न राज्यों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना ठोस सबूत के केवल राजनीतिक मंशा से ये टैरिफ थोपे हैं।
व्यापारिक आक्रामकता और अनिश्चितता का दौर
दो साल से जारी आर्थिक झटकों और अदालती हार के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप उच्च टैरिफ को घरेलू उद्योगों की रक्षा, अमेरिकी निवेश आकर्षित करने और सहयोगियों पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी हथियार मानते हैं।
यदि प्रशासन इस कानूनी जंग में हारता है, तो उसे वसूला गया सारा राजस्व वापस करना पड़ सकता है। फिर भी, व्हाइट हाउस अपनी आक्रामक व्यापार नीति पर पूरी तरह कायम है, जिससे व्हाइट हाउस और अदालतों के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
हॉस्पिटल स्टॉक्स पर गहरा प्रहार, सुप्रीम कोर्ट की सख्त आलोचना

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर काशी समाज ने नाबालिगों की सुरक्षा में स्वागत किया

हॉस्पिटल स्टॉक्स पर तेज़ पिटाई: क्यों 'बीमार' हो गए शेयर?

सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी से अस्पताल शेयरों में तेज़ गिरावट

हॉस्पिटल शेयरों पर तेज़ गिरावट: सुप्रीम कोर्ट की कठोर आलोचना

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हॉस्पिटल शेयरों पर भारी प्रहार

हॉस्पिटल शेयरों पर तीव्र गिरावट: क्यों हुआ यह संकट?

सुप्रीम कोर्ट की सख़्त चेतावनी से हॉस्पिटल शेयरों पर कड़ी मार
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी से अस्पताल शेयरों पर तेज़ गिरावट
- अस्पताल शेयरों पर कठोर सजा
- सुप्रीम कोर्ट की कठोर चेतावनी ने अस्पताल शेयरों को धक्का दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: दिवाली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं, पर उपयोग के प्रकार और समय पर सीमाएँ तय होंगी
- हॉस्पिटल स्टॉक में तेज गिरावट, सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार
- सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, मल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की
- सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को सोशल‑मीडिया से जोड़ा कड़ा नियम
- लखीसराय में विशेष लोक अदालतों की तैयारी हेतु न्यायिक अधिकारियों ने की रणनीतिक बैठक

