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ट्रम्प के नए टैरिफ पर फिर से अदालत में चुनौती, कानूनी जंग तेज

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व टैरिफ को खारिज किए सात महीने बाद, ट्रम्प प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 86 देशों पर नए शुल्क लागू किए। न्यूयॉर्क के अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड कोर्ट में छोटे व्यापारियों और कई राज्यों ने इन टैरिफ को बिना ठोस सबूत के राजनीतिक कदम कहा, जिससे सुनवाई में तीव्र प्रतिरोध दिख रहा है। अगर प्रशासन को हार का सामना करना पड़ा तो उसे वसूले गए राजस्व को लौटाना पड़ सकता है।

30 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
ट्रम्प के नए टैरिफ पर फिर से अदालत में चुनौती, कानूनी जंग तेज

सौजन्य से:- Jagran

ट्रंप के नए टैरिफ को फिर से कोर्ट में चुनौती, कानूनी मोर्चे पर बढ़ा संघर्ष

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व के टैरिफ को खारिज किए जाने के सात महीने बाद, ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 ...और पढ़ें

HighLights

- न्यायिक शिकंजे में ट्रंप की व्यापारिक नीतियां

- ट्रेड एक्ट की धारा 301 बनी विवाद की जड़

डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक आयात पर लगाए गए नए शुल्कों (टैरिफ) को लेकर कानूनी लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व के टैरिफ को खारिज किए जाने के सात महीने बाद, ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 86 देशों पर नए शुल्क लगा दिए हैं।

ट्रंप का तर्क है कि ये देश 'जबरन श्रम' को रोकने में नाकाम रहे हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ है। हालांकि, आलोचकों और छोटे व्यापारियों ने इस कदम को राजनीतिक और कानूनी रूप से मनमाना करार दिया है।

छोटे व्यवसायों व राज्यों द्वारा व्यापक कानूनी विरोध

न्यूयार्क स्थित इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। लिबर्टी जस्टिस सेंटर की चेयर सारा अल्ब्रेक्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "जब तक प्रशासन कानूनों का दुरुपयोग करता रहेगा, हम उन्हें चुनौती देते रहेंगे।"

छोटे व्यवसायों और विभिन्न राज्यों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना ठोस सबूत के केवल राजनीतिक मंशा से ये टैरिफ थोपे हैं।

व्यापारिक आक्रामकता और अनिश्चितता का दौर

दो साल से जारी आर्थिक झटकों और अदालती हार के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप उच्च टैरिफ को घरेलू उद्योगों की रक्षा, अमेरिकी निवेश आकर्षित करने और सहयोगियों पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी हथियार मानते हैं।

यदि प्रशासन इस कानूनी जंग में हारता है, तो उसे वसूला गया सारा राजस्व वापस करना पड़ सकता है। फिर भी, व्हाइट हाउस अपनी आक्रामक व्यापार नीति पर पूरी तरह कायम है, जिससे व्हाइट हाउस और अदालतों के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है।

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