स्विट्जरलैंड की आबादी पर सीमा लगाने के खिलाफ चार दिनों में होगा इतिहासकारी मतदान
स्विट्जरलैंड अपनी आबादी को 2050 तक 1 करोड़ तक सीमित करने के प्रस्ताव पर ऐतिहासिक मतदान कर रहा है, जिसके समर्थन और विरोध में कई लोगों ने अपनी राय व्यक्त की है। आलोचक आर्थिक अलगाव और गंभीर श्रम कमी की चेतावनी दे रहे हैं।

सौजन्य से:- Jagran
क्या एक करोड़ पर थम जाएगी स्विट्जरलैंड की आबादी? जनसंख्या नियंत्रण कानून पर हो रही वोटिंग
स्विट्जरलैंड अपनी आबादी को 2050 तक 1 करोड़ तक सीमित करने के प्रस्ताव पर ऐतिहासिक मतदान कर रहा है। ...और पढ़ें
HighLights
स्विट्जरलैंड 2050 तक आबादी 1 करोड़ तक सीमित करने पर मतदान कर रहा है
बढ़ते आप्रवासन से भीड़ और बुनियादी ढांचे पर दबाव कम करने का लक्ष्य
आलोचक आर्थिक अलगाव और गंभीर श्रम कमी की चेतावनी दे रहे हैं
डिजिटल डेस्क, बर्न। स्विट्जरलैंड इतिहास में पहली बार अपनी जनसंख्या पर औपचारिक सीमा लगाने के वोटिंग करा रहा है। यहां के लोग आबादी को 1 करोड़ (10 मिलियन) तक सीमित करने के प्रस्ताव पर वोट करेंगे।
दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी (SVP) द्वारा पेश इस प्रस्ताव में साल 2050 तक देश की आबादी को 10 मिलियन (1 करोड़) तक सीमित करने की मांग की गई है।
जहां एक तरफ समर्थकों का मानना है कि बेकाबू आप्रवासन (Immigration) के कारण ट्रेनों में भीड़, महंगे मकान और बुनियादी ढांचे पर असहनीय दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार, व्यापार संगठनों और आलोचकों ने इसे बेतुका और खतरनाक कदम बताया है।
आलोचकों का तर्क है कि इस फैसले से देश में गंभीर लेबर शॉर्टेज (कामगारों की कमी) हो जाएगी और यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त आवागमन समझौता टूटने से स्विट्जरलैंड आर्थिक रूप से अलग-थलग पड़ सकता है। पूरे यूरोप की नजरें अब इस स्विस जनमत संग्रह पर टिकी हैं, जिसे देश का 'ब्रेक्सिट मोमेंट' कहा जा रहा है।
स्विट्जरलैंड में क्यों जनसंख्या कम करने पर चल रहा विचार?
गौरतलब है कि पिछले दो दशकों में स्विट्जरलैंड की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। 2002 में यूरोपीय संघ के साथ देश के मुक्त आवागमन समझौते के लागू होने के बाद से जनसंख्या लगभग 73 लाख से बढ़कर 91 लाख से अधिक हो गई है। आज, लगभग 27% निवासी विदेशी नागरिक हैं, जो यूरोप में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है।
एसवीपी और समर्थकों का तर्क है कि अनियंत्रित आप्रवासन से ट्रेनों में भीड़, महंगे आवास और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा है, जिससे स्विट्जरलैंड अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच रहा है। इसके विपरीत, आलोचकों और ग्रीन पार्टी का कहना है कि राजनीतिक-आर्थिक कमियों को छिपाने के लिए प्रवासियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
खबरें और भी
कैसे काम करेगा प्रस्ताव?
इस प्रस्ताव के तहत सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि 2050 से पहले स्विट्जरलैंड की जनसंख्या 10 मिलियन से अधिक न हो। यदि जनसंख्या 95 लाख तक पहुंच जाती है, तो अधिकारियों को प्रवासन को रोकने के लिए उपाय करने होंगे। इनमें शरण संबंधी सख्त नियम और विदेशी निवासियों के लिए परिवार के पुनर्मिलन पर प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं।
यदि जनसंख्या नियंत्रण के अन्य उपाय विफल रहे, तो स्विट्जरलैंड को यूरोपीय संघ (EU) के साथ अपना 'मुक्त आवागमन समझौता' तोड़ना पड़ सकता है, जो दोनों ओर के नागरिकों को स्वतंत्र रहने और काम करने की आजादी देता है। हालांकि, इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पारित होने के लिए देश के बहुसंख्यक मतदाताओं और कैंटन (राज्यों) दोनों की मंजूरी जरूरी है।
स्विस सरकार, व्यापारिक संगठनों और यूनियनों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे देश की समृद्धि के लिए खतरा बताया है। आलोचकों का तर्क है कि स्विट्जरलैंड का स्वास्थ्य, तकनीक, वित्त और होटल उद्योग विदेशी कामगारों पर बहुत अधिक निर्भर है।
तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण आने वाले समय में श्रमिकों और करदाताओं की मांग और बढ़ेगी, ऐसे में प्रवासन पर रोक से श्रम संकट गहरा सकता है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ (EU) के साथ संबंध बिगड़ने से स्विट्जरलैंड को यूरोपीय बाजारों से हाथ धोना पड़ सकता है, जिससे देश आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएंगे।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
डिजिटल तकनीक के माध्यम से कानून को लोगों तक पहुँचाने की चुनौती

बृजभूषण शरण सिंह मामले में अदालत ने क्यों माना आरोप झूठे?

बस्तर में 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत की तैयारियां की गईं

ट्रांसजेंडर योजना और लोक अदालत के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रम

मेटा के लिए भारतीय कानून का सख्त निर्देश: सीसीएएम और सिंथेटिक कंटेंट पर कार्रवाई की बातचीत

विदेशी फंडिंग के नए नियमों पर भारत-अमेरिका में बढ़ता तनाव

सीमा सुरक्षा बलों को कानूनी जागरूकता अभियान में शामिल करने के लिए प्रतिनिधि का प्रस्ताव

सिर्फ ग्लोबल पॉलिसी से नहीं, भारतीय कानून से मेटा को भी कैसा पालन?
ताज़ा ख़बरें
- मेटा को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा: सरकार
- विदेशी चंदे पर कानून: कब और क्यों बना, कितनी बार बदला?
- सुप्रीम कोर्ट ने बैंक-बिल्डर गठजोड़ पर कसा दांव, क्या है इसका मतलब?
- बाढ़ का कहर जारी, E20 पेट्रोल पर बड़ा अपडेट
- E20 पेट्रोल में मिलावट के दावे की पुष्टि नहीं, तेल कंपनियों की सफाई
- जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज, अदालत ने आरोपी को जेल भेजा
- वियतनाम में कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए एक केंद्रीकृत और आधुनिक विनियमन
- दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी का नया कानून, 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए होंगी आरक्षित

