सुप्रीम कोर्ट की माफी‑नीति से अपराध में बढ़ोतरी: जस्टिस दीपांकर दत्ता का चेतावनी संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि मृत्युदंड को आजीवन कारावास में परिवर्तित करने की माफ़ी‑भरी प्रवृत्ति देश में अपराधों को बढ़ा रही है। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इसी बात को दोहराते हुए बताया कि लगातार माफ़ी से सीमा तय करनी होगी, क्योंकि एक मामले में दंड में कमी के बाद अपराधी ने फिर से हत्या की।

सौजन्य से:- Jagran
सुप्रीम कोर्ट के माफ करने के रवैये से बढ़ रहे अपराध, जस्टिस दीपांकर दत्ता की बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की है कि मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने की 'क्षमाशील प्रकृति' के कारण देश ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने पर चिंता जताई।
- जस्टिस दत्ता ने कहा, 'क्षमाशील प्रकृति' के कारण अपराध बढ़ रहे हैं।
- शीर्ष अदालत ने एक दोषी की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुनवाई की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौखिक टिप्पणी की कि मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने के मामलों में उसकी माफ करने की प्रकृति के कारण देश में अपराध बढ़ रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस प्रकृति पर कहीं न कहीं तो रोक लगानी होगी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ एक ऐसे दोषी की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे हत्या के एक मामले में मृत्युदंड सुनाया गया था और बाद में उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। जस्टिस दत्ता ने मौखिक टिप्पणी की कि पहले हत्या के मामलों में दोषसिद्धि 'दुर्लभतम में दुर्लभ' सिद्धांत के आधार पर होती थी, लेकिन अब समय बदल गया है।
उन्होंने कहा, 'हमारी क्षमाशील प्रकृति के कारण भारत इन समस्याओं का सामना कर रहा है। माफ करते रहना, माफ करते रहना... आखिर कहीं तो एक सीमा तय करनी होगी।' जस्टिस दत्ता ने उस मामले का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति के मृत्युदंड को कम कर दिया था, जिसने अपनी बड़ी बेटी के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी।
उन्होंने कहा, 'मां की गवाही के आधार पर पिता को आजीवन कारावास की सजा हुई। कुछ वर्ष बाद वह पैरोल पर जेल से बाहर आया और अपनी छोटी बेटी के सामने मां की हत्या कर दी। छोटी बेटी की गवाही के आधार पर उसे मृत्युदंड दिया गया। फिर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया कि उसने छोटी बेटी की हत्या नहीं की थी।'
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बुलंदशहर में 47 साल बाद चौकीदार को मिली रिहाई, 140 बोरी गेहूँ के बड़े गबन केस में निर्दोष ठहराया

जम्मू‑कश्मीर हाई कोर्ट ने इरान में एमबीबीएस कर रही छात्रा के पासपोर्ट को पुनः सक्रिय करने का आदेश

अलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की एनएसए हिरासत में ‘आंदोलनजीवी’ शब्द पर उठाए सवाल

गवाहियों में विरोधाभास, रामपुर अदालत ने चोरी के केस में तीन आरोपियों को बरी किया

न्यायाधीश ओका ने जताया कि न्यायाधीश भुवन का मत में कोई अनैतिकता नहीं

दिल्ली में 9-10 अक्टूबर को शराब की दुकानों पर एहतियाती प्रतिबंध

जज वी गोपाला गोडा ने एसी के विशेष संशोधन फैसले को रद्द करने का आग्रह किया

पूर्व सर्वोच्च न्यायाधीश गोपाल गौडा ने कहा: SIR फैसले को पुनः विचार किया जाना चाहिए, ईसीआई ने कोर्ट को धोखा दिया
ताज़ा ख़बरें
- 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने इलेक्शन कमीशन का समर्थन किया, SIR को वैध घोषित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: शादी से इनकार को आत्महत्या के उकसाने के रूप में नहीं माना जा सकता
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में दोबारा निकाय चुनाव का आदेश, प्रक्रिया पूरी होगी छह हफ्तों में
- बिहार के रोहतास में बाल अपहरण‑दुर्व्यवहार केस में आरोपी को 20 साल कठोर कारावास
- UP पुलिस में 470 खिलाड़ी-उपनिरीक्षक, CM योगी ने सौंपे नियुक्ति पत्र
- श्रमिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कड़े श्रम कानूनों की आवश्यकता
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 नगर वार्डों के चुनाव रद्द, नए मतदान के आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने महंगी दवाओं व डॉक्टर‑फार्मा गठबंधन पर कड़ी कार्रवाई, ज़ी बिज़नेस की पहल ने बढ़ाई जवाबदेही

