सुप्रीम कोर्ट को SIR निर्णय वापस लेना चाहिए, पूर्व जज ने चुनाव आयोग पर फर्जी दस्तावेज़ दिखाने का आरोप
जस्टिस गौड़ा ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह अपने पिछले फैसले को उलट कर चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मांगे, ताकि यह पता चल सके कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का निर्णय अधिकांश कमिश्नरों की सहमति से लिया गया था या नहीं। उन्होंने आयोग द्वारा कोर्ट को भ्रामित करने और फर्जी तथ्य प्रस्तुत करने का आरोप लगाया, तथा SIR प्रक्रिया को गैर‑कानूनी और असंवैधानिक बताया।

सौजन्य से:- Hindustan
SIR फैसले को वापस ले सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग ने फ्रॉड किया: SC के पूर्व जज
जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से एसआईआर फैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए ताकि यह पता चल सके कि SIR का फैसला आयोग ने ज्यादातर इलेक्शन कमिश्नरों की सहमति और मंजूरी से लिया था या नहीं।
चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस पर देशभर में बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं, तो अब पूर्व जज ने सुप्रीम कोर्ट से इसको लेकर एक अपील कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गोपाल गौड़ा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को अपने उस फैसले को वापस ले लेना चाहिए, जिसमें उसने एसआईआर को सही ठहराया था। पूर्व जज ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने गलत फैक्ट्स दिखाकर कोर्ट को गुमराह करके फ्रॉड किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मई महीने में बिहार में SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा था।
लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से एसआईआर फैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए ताकि यह पता चल सके कि SIR का फैसला आयोग ने ज्यादातर इलेक्शन कमिश्नरों की सहमति और मंजूरी से लिया था या नहीं। जस्टिस गौड़ा ने कहा, "SIR फैसले में गैर-कानूनी और असंवैधानिकता साफ दिख रही है।" वहीं, हाल ही में फॉर्म-6 को लेकर विवाद हुआ, जिसमें बदलाव करने के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी।
जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के तौर पर वोटरों के बड़े पैमाने पर वोटिंग से वंचित होने के खिलाफ कमेंट करके जस्टिस उज्जल भुयान ने कोई कानूनी गलती नहीं की। एक जज के तौर पर जस्टिस भुइयां को संवैधानिक मुद्दे पर बोलने का हक था। वहीं, जस्टिस भुइयां के खिलाफ पूर्व सीजेआई बीआर गवई की आलोचना पर बात करते हुए जस्टिस गौड़ा ने कहा कि उन्हें ऐसी आलोचना करने का क्या अधिकार है? उन्होंने कहा, ''जब पूर्व सीजेआई गवई बॉम्बे हाई कोर्ट के जज थे, तब उन्होंने लोया केस पर टिप्पणी की थी, जब उस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने चुनाव आयोग के कमिश्नरों की असहमति वाले मुद्दे पर भी जवाब नहीं दिया।''
उज्जवल भुइयां ने ऐसा क्या कहा था?
पूर्व सीजेआई बी. आर. गवई ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के मताधिकार से वंचित किए जाने संबंधी बयान की सोमवार को आलोचना की थी और कहा था कि उन्हें वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। जस्टिस भुइयां ने रविवार को 'नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' में '19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता' के समापन समारोह में कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
'जो केस कोर्ट में उस पर टिप्पणी करने की इजाजत नहीं'
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग की व्यवस्था नहीं करता है-एक जिन्हें वोट देने का अधिकार हो और दूसरे जिन्हें न हो-और किसी भी तरह का किंतु-परंतु इस तरह की प्रक्रिया को सही नहीं ठहरा सकता। इस मुद्दे पर 'पीटीआई-भाषा' से अपनी पहली प्रतिक्रिया में पूर्व प्रधान न्यायाधीश गवई ने कहा, ''न्यायिक मर्यादा उन्हें उस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने की इजाजत नहीं देती, जो अदालत में विचाराधीन है।''
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के झूठे तथ्य सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट को SIR निर्णय रद्द करना चाहिए, न्यायाधीश गोपाल गौडा का तर्क

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका ने CEC ज्ञानेश कुमार व अन्य इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति को चुनौती दी

42 पूर्व न्यायाधीशों ने ईसीआई की रक्षा में लिखा खुला पत्र, ‘राजनीतिक हितों द्वारा संचालित योजनाबद्ध अभियानों’ की निंदा

प्रांतीय प्रतिनिधिमंडल ने आठ मसौदा विधियों पर प्रतिक्रियाओं का सर्वेक्षण किया

सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आर्ट ऑफ लिविंग आदेश को रद्द किया, 18 प्रक्रिया त्रुटियों की ओर इशारा

न्याय मंत्रालय ने कानूनी दस्तावेज़ों पर मसौदा कानून की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया

हो ची मिन्ह सिटी में कानूनी मानक दस्तावेज़ प्रचार विधि का मसौदा: तेज़ और प्रभावी निर्माण प्रक्रिया के प्रस्ताव

राहुल गांधी पर दिल्ली पुलिस का बलपूर्वक कार्रवाई, विरोधी नेताओं ने CEC के इस्तीफे की माँग
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज, विश्वविद्यालय शिक्षकों को एजीपी का लाभ प्रारंभिक पात्रता तिथि से
- एसएमई विकास के लिए नया मसौदा कानून: लक्ष्य‑आधारित समर्थन और डिजिटल निगरानी
- अल्लाहाबाद उच्च न्यायालय से 4 सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, 7 उच्च न्यायालयों का अभाव
- भूमि, अचल‑संपत्ति व आवास कानून के संशोधन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया का आह्वान
- प्रांतीय प्रतिनिधियों ने मसौदा कानूनों पर विस्तृत चर्चा, स्थानीय लोकतंत्र व श्रम सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सुझाव दिए
- गुर्विंदर पाल सिंह को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में दिल्ली हाई कोर्ट में नियुक्त किया गया
- आलाहाबाद हाई कोर्ट के 4 न्यायमूर्ति सुप्रीम कोर्ट में, 9 हाई कोर्ट अब भी बिना प्रतिनिधित्व
- सुप्रीम कोर्ट ने महंगी दवाओं व डॉक्टर‑फार्मा गठबंधन पर कड़ी कार्रवाई, ज़ी बिज़नेस की पहल ने बढ़ाई जवाबदेही

