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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज, विश्वविद्यालय शिक्षकों को एजीपी का लाभ प्रारंभिक पात्रता तिथि से

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया। अब विश्वविद्यालय के लगभग एक हजार शिक्षकों को एजीपी का अधिकार उस तिथि से मिलेगा, जिस दिन वे पात्र हुए थे, न कि 15 दिसंबर 2022 की अधिसूचना तिथि से।

7 अक्टूबर 2026 को 02:06 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज, विश्वविद्यालय शिक्षकों को एजीपी का लाभ प्रारंभिक पात्रता तिथि से

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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झारखंड सरकार की विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज:विश्वविद्यालय शिक्षकों को पात्रता की तारीख से मिलेगा एजीपी का लाभ

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यूजीसी नियमावली के तहत विश्वविद्यालय शिक्षकों को मिलने वाले अकादमिक ग्रेड पे (एजीपी) और वित्तीय लाभ के मामले में झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने पांच अक्टूबर को राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी है। साथ ही हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अब इन शिक्षकों को एजीपी का लाभ 15 दिसंबर 2022 की अधिसूचना की तारीख से नहीं, बल्कि जिस तारीख से वे इसके लिए पात्र हुए थे, उसी तारीख से मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से करीब 1000 शिक्षकों को इसका फायदा मिलेगा।

राज्य सरकार ने यूजीसी नियम-2010 बनाने में करीब 12 साल लगा दिए। इसकी अधिसूचना 15 दिसंबर 2022 को जारी हुई। बाद में उसी देरी का हवाला देकर शिक्षकों को वित्तीय लाभ 15 दिसंबर 2022 से देने की शर्त लगा दी। सिदो कान्हू मुर्मू यूनिवर्सिटी दुमका के शिक्षक डॉ. कलानंद ठाकुर व अन्य ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने 17 मई 2024 को फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2022 के परिनियम के खंड 1.3 में वित्तीय लाभ उसी तारीख से देने वाली शर्त रद्द कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार अपनी देरी का लाभ उठाकर शिक्षकों के वित्तीय अधिकार को सीमित नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने पात्र शिक्षकों के मामले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आदेश की प्रति मिलने के बाद चार महीने का समय दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था-पेंशनरों को 2010 से लाभ तो शिक्षकों को 2022 से क्यों

हाईकोर्ट को सरकार की व्यवस्था में एक बड़ा अंतर मिला था। सरकार ने पेंशनरों को 1 अप्रैल 2010 से वित्तीय लाभ दिया था, जबकि सेवारत शिक्षकों के लिए 15 दिसंबर 2022 की तारीख तय की थी। कोर्ट ने इसे सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा था कि समान श्रेणी के कर्मचारियों के लिए वित्तीय लाभ की तारीख अलग क्यों। इसका कोई ठोस आधार होना चाहिए। कोर्ट ने माना कि सरकार का निर्णय निष्पक्ष, तर्कसंगत और समानता पर आधारित होना चाहिए। मनमाने तरीके से लाभ की तारीख तय करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार के खिलाफ हो सकता है।

सरकार पहले हाईकोर्ट की खंडपीठ, फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने खंडपीठ में विशेष अनुमति याचिका दायर की। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को राहत नहीं दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने भी पांच अक्टूबर को यह याचिका खारिज कर दी।

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