'रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर एक हफ्ते के भीतर समिति गठित करे केंद्र', सुप्रीम कोर्ट का निर्देश - sc directs centre form panel for retired judges benefits policy
'रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर एक हफ्ते के भीतर समिति गठित करे केंद्र', सुप्रीम कोर्ट का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों के लिए समान राष्ट्रीय नीति बनाने हेतु एक सप्ताह में समिति…

सौजन्य से:- Jagran
'रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर एक हफ्ते के भीतर समिति गठित करे केंद्र', सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों के लिए समान राष्ट्रीय नीति बनाने हेतु एक सप्ताह में समिति गठित करने का निर्देश दिया है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सेवानिवृत्त जजों पर समिति बनाने को कहा
- हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों के लिए समान राष्ट्रीय नीति बनेगी
- एक सप्ताह में समिति न बनने पर कोर्ट स्वयं गठित करेगा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों के लिए ड्राइवरों, सुरक्षा सेवाओं और यात्रा के दौरान सरकारी आवास में ठहरने जैसे सेवानिवृत्ति लाभों के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति के संबंध में एक सप्ताह के भीतर समिति गठित करे।
साथ ही न्यायालय ने कहा कि यदि केंद्र समिति नहीं बनाता है तो न्यायालय खुद समिति गठित करेगा। 10 दिन बाद मामले पर फिर सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा वी मोहन की पीठ ने अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की उस याचिका पर गौर किया जिसमें उन्होंने पैनल स्थापित करने के लिए और समय मांगा।
सेवानिवृत्त जजों पर समिति बनाने का निर्देश
इससे पहले 20 जुलाई को पीठ ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर पैनल गठित करने का निर्देश दिया था और तीन महीने में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। 20 जुलाई को, पीठ ने केंद्र से कहा था कि वह पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के लाभों जैसे ड्राइवरों की सेवाएं, सुरक्षा और यात्रा के दौरान सरकारी आवास में ठहरने के लिए दो सप्ताह के भीतर पैनल स्थापित करे।
इसने यह भी निर्देश दिया था कि पैनल को इस मुद्दे पर तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। पीठ जस्टिस वीएस दवे द्वारा दायर एक अवमानना याचिका की सुनवाई कर रही थी जोकि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के संघ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के मुद्दे को उठाया था।
एक सप्ताह के भीतर बने समिति
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने कुछ राज्यों द्वारा सुरक्षा कर्मियों और ड्राइवरों को प्रदान की जा रही वित्तीय सहायता की पर्याप्तता पर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा- '45,000-50,000 रुपये में क्या एक ड्राइवर और एक सुरक्षा अधिकारी मिल सकता है?'
मुख्य न्यायाधीश ने अतिरिक्त सालिसिटर जनरल से कहा- 'राज्यों के बीच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को दी जाने वाली सुविधाओं में एकरूपता की कमी है। एक तरीका यह है कि भारत सरकार एक समिति का गठन करे और मानदंड निर्धारित करे। केंद्रीय सरकार भी अनुदान में हिस्सेदारी कर सकती है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो हमें एक समिति गठित करनी पड़ेगी।'
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