सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को SC जज के पद के लिए सिफ़ारिश की
28 सितंबर 2026 को हुई कॉलेजियम बैठक में गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस—सुनीता अग्रवाल, देवेंद्र कुमार उपाध्याय और अपरेश कुमार सिंह—को सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की सिफ़ारिश की गई। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जिसकी स्वीकृति पर वे तीनों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के 38‑सदस्यीय बेंच में शामिल हो सकेंगे, जहाँ वर्तमान में 34 पद भरे हुए हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 की बैठक में तीन प्रमुख हाई कोर्ट के चीफ जजों को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की है। कॉलेजियम की 28 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में इन नामों पर फैसला लिया गया।
कॉलेजियम ने इन नामों की सिफारिश
कॉलेजियम ने गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की है।
कॉलेजियम ने जारी किया बयान
कॉलेजियम की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर, 2026 को हुई अपनी बैठक में हाई कोर्ट के निम्नलिखित चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किए जाने की सिफारिश की है।
केंद्र सरकार के पास जाएगी सिफारिश
कॉलेजियम की यह सिफारिश केंद्र सरकार के पास जाएगी। केंद्र की मंजूरी के बाद ये तीनों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में पदभार ग्रहण करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल 38 जज का पद सेंक्शन है जिसमें 34 पद पर जस्टिस कार्यरत हैं चार पद खाली है। मौजूदा कॉलेजियम बैठक में तीन पद के लिए सिफारिश की गई है।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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