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सुप्रीम कोर्ट में जजों से बदसलूकी करने वाला प्रबल कौन?

इटावा के नगला जयलाल निवासी प्रबल प्रताप यादव ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों को बदसलूकी की है और इसके पीछे क्या कारण है, यह जानने के लिए पुलिस जांच कर रही है। उसके परिवार का कहना है कि वह आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहा था, जिसके चलते यह घटना हुई है।

12 जुलाई 2026 को 02:14 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में जजों से बदसलूकी करने वाला प्रबल कौन?

सौजन्य से:- nedricknews.com

Prabal Pratap Yadav News: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों के सामने अपशब्द बोलने के मामले में अब कई नई बातें सामने आ रही हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि इटावा के नगला जयलाल, भर्थना निवासी प्रबल प्रताप यादव कथित तौर पर इस मामले को देशभर में चर्चा में लाने की योजना के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। पुलिस को मिली एक ईमेल में प्रबल ने लिखा था कि वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा और पूरे देश में हाईलाइट हो जाएगा।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, प्रबल ने खुद अपना केस लड़ने के लिए आवेदन किया था। पुलिस का कहना है कि उसकी कोशिश अपने मामले को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की थी। हालांकि, उसके परिवार का कहना है कि वह लंबे समय से आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहा था, जिसके चलते यह घटना हुई।

कंपनी से विवाद के बाद शुरू हुआ कानूनी संघर्ष| Prabal Pratap Yadav News

पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रबल प्रताप यादव लखनऊ स्थित डुप्लेक्स टेक्नोलॉजीज में काम करता था। आरोप है कि नौकरी के दौरान उसने कंपनी की दो महिला कर्मचारियों को परेशान किया था। इनमें से एक हिंदू और दूसरी मुस्लिम युवती बताई जा रही है। दोनों ने कंपनी प्रबंधन से प्रबल के खिलाफ लिखित शिकायत की थी।

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शिकायत के बाद कंपनी ने उसे नौकरी से हटा दिया था। इसके बाद प्रबल ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उस पर भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी और गबन जैसे कई आरोप लगाए। उसने कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

डुप्लेक्स टेक्नोलॉजीज सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रबल ने स्पेशल सीजेएम कस्टम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। वह कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग कर रहा था। कोर्ट ने उसकी याचिका को परिवाद के रूप में स्वीकार कर लिया, लेकिन प्रबल चाहता था कि पुलिस केस दर्ज करे। इसके बाद उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का रुख किया। हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद उसने पुलिस कमिश्नर को कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश देने की मांग की। जब उसकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना पक्ष रखते हुए उसने न्यायाधीशों के सामने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

पिता बोले- आर्थिक संकट और तनाव में था बेटा

प्रबल प्रताप के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने बेटे के व्यवहार को लेकर अलग वजह बताई है। उन्होंने कहा कि प्रबल लंबे समय से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। इसी दौरान वह साइबर फ्रॉड का भी शिकार हुआ, जिसमें उसे काफी नुकसान हुआ। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। उनके पास केवल दो बीघा जमीन है। परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। बेटियों की शादी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रबल पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहता था और अच्छी नौकरी पाने की कोशिश कर रहा था।

उन्होंने बताया कि प्रबल ने तीन साल पहले चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज से बीएड किया था। सरकारी नौकरी नहीं मिलने के बाद वह लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने चला गया। वहां रहने और खर्च चलाने के लिए वह ट्यूशन पढ़ाता था और एक निजी कंपनी में नौकरी भी करता था।

साइबर फ्रॉड की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप

प्रबल के ताऊ रविंद्र सिंह ने बताया कि साइबर फ्रॉड की घटना के बाद उन्होंने संबंधित थाने में शिकायत की थी। जब वहां सुनवाई नहीं हुई तो पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिवार के मुताबिक, इसी वजह से प्रबल ने अदालत का रास्ता अपनाया। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद वह हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में प्रबल की मानसिक स्थिति, उसके कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के पीछे की पूरी योजना को भी खंगाला जा रहा है। वहीं घटना के बाद यह मामला न्यायपालिका की सुरक्षा और अदालतों में व्यवहार को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।

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