सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी ज्ञानवापी विवाद को विशेष लोक अदालत में भेजे, बातचीत से समझौता की सलाह
वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष लोक अदालत भेजकर आपसी बातचीत से समझौते की दिशा दिखाई है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास जी के तहखाने में पूजा करने का अधिकार दे दिया है।

सौजन्य से:- ndtv.in
- वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद सुप्रीम कोर्ट ने विशेष लोक अदालत में भेजकर आपसी बातचीत से समाधान की दिशा सुझाई है
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद बनने से पहले वहां एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था
- मुस्लिम पक्ष पूजा स्थल अधिनियम का हवाला देते हुए 1947 की स्थिति को बनाए रखने की मांग करता है
नई दिल्ली:
वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. अदालत ने हिंदू-मुस्लिम के इस विवाद को विशेष लोक अदालत भेज दिया है. उच्चतम न्यायालय ने लोक अदालत के जरिए आपस में बैठकर बातचीत से समझौते की बात कही है. समाधान विशेष लोक अदालत 21, 22 और 23 अगस्त को होनी है. इससे पहले 14 जुलाई को वाराणसी में लोक अदालत से पहले पूर्व सुलह वार्ता पर सुनवाई होगी.
क्या है ज्ञानवापी विवाद?
- ज्ञानवापी वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा एक ऐतिहासिक और कानूनी मामला है. हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669 में मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाई थी, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि वहां शुरू से ही मस्जिद थी.
- हिंदू पक्ष का आरोप है कि राजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाए गए मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब ने तोड़ दिया था और फिर उस पर मस्जिद का निर्माण कराया गया. इसके सबूत आज भी मस्जिद की दीवारों पर देखे जा सकते हैं.
- अगस्त 2021 में, पांच हिंदू महिलाओं ने वाराणसी की अदालत में याचिका दायर कर ज्ञानवापी परिसर की बाहरी दीवार पर स्थित मां श्रृंगार गौरी और अन्य देवी-देवताओं की नियमित पूजा की मांग की.
- कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया. एएसआई की रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि मस्जिद के निर्माण से पहले वहां एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था.
- जनवरी 2024 में, वाराणसी जिला अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी मस्जिद के 'व्यास जी के तहखाने' में नियमित पूजा-पाठ करने का अधिकार दिया.
- मुस्लिम पक्ष इस मामले में 'पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991' का हवाला देता है. इस कानून के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस स्थिति में था, उसकी प्रकृति/स्वरूप को बदला नहीं जा सकता.
यह पूरा मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट और वाराणसी की विभिन्न अदालतों में विचाराधीन है.
इसे भी पढ़ें: ज्ञानवापी मामले में कोर्ट का सख्त रुख, अंजुमन इंतजामिया और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास पर लगाया जुर्माना
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