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पत्नी अपने पति की सहमति या किसी कानूनी/मेडिकल आदेश के बिना उसे नशा मुक्ति केंद्र में कैद करने की अनुमति नहीं दे सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि निजी पुनर्वास केंद्रों (रिहैबिलिटेशन सेंटर्स) के पास केवल जीवनसाथी (पति या पत्नी) की सहमति के आधार पर किसी व्यक्ति को कैद रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। [2026 लाइव लॉ (MP) 423] इस बात पर जोर देते हुए कि किसी व्यक्ति को नशा मुक्ति केंद्र में केवल उसकी अपनी मर्जी से या किसी सक्षम कानूनी या मेडिकल आदेश के तहत ही भर्ती किया जा सकता है, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने टिप्पणी की: "किसी निजी पुनर्वास केंद्र के पास केवल जीवनसाथी की सहमति के आधार पर किसी

22 अक्टूबर 2026 को 02:38 pm बजे
पत्नी अपने पति की सहमति या किसी कानूनी/मेडिकल आदेश के बिना उसे नशा मुक्ति केंद्र में कैद करने की अनुमति नहीं दे सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी

स्रोत संक्षेप

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि निजी पुनर्वास केंद्रों (रिहैबिलिटेशन सेंटर्स) के पास केवल जीवनसाथी (पति या पत्नी) की सहमति के आधार पर किसी व्यक्ति को कैद रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। [2026 लाइव लॉ (MP) 423] इस बात पर जोर देते हुए कि किसी व्यक्ति को नशा मुक्ति केंद्र में केवल उसकी अपनी मर्जी से या किसी सक्षम कानूनी या मेडिकल आदेश के तहत ही भर्ती किया जा सकता है, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने टिप्पणी की: "किसी निजी पुनर्वास केंद्र के पास केवल जीवनसाथी की सहमति के आधार पर किसी

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लाइव लॉ हिंदी — मूल रिपोर्ट

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