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गवाहों के मुकरने के बावजूद मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर पति और सास-ससुर की हत्या की सजा बरकरार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सभी तथ्यात्मक गवाहों के मुकर जाने मात्र से मृत्यु पूर्व बयान को पूरी तरह अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने जलने से महिला की मौत के मामले में उसके पति और सास-ससुर की हत्या के लिए दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि कई बार अभियोजन पक्ष के गवाहों को भावनात्मक दबाव या आर्थिक और अन्य लाभ देकर अपने पक्ष में कर लिया जाता है। हालांकि, अदालत ने दो अन्य आरोपियों विपिन और मदन

23 अक्टूबर 2026 को 07:11 am बजे
गवाहों के मुकरने के बावजूद मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर पति और सास-ससुर की हत्या की सजा बरकरार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी

स्रोत संक्षेप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सभी तथ्यात्मक गवाहों के मुकर जाने मात्र से मृत्यु पूर्व बयान को पूरी तरह अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने जलने से महिला की मौत के मामले में उसके पति और सास-ससुर की हत्या के लिए दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि कई बार अभियोजन पक्ष के गवाहों को भावनात्मक दबाव या आर्थिक और अन्य लाभ देकर अपने पक्ष में कर लिया जाता है। हालांकि, अदालत ने दो अन्य आरोपियों विपिन और मदन

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