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दोषी की समयपूर्व रिहाई याचिका खारिज करने का फैसला पहले से तय होने जैसा, रिपोर्टों का विश्लेषण नहीं किया: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड किसी दोषी की समयपूर्व रिहाई की याचिका को बिना उचित विचार-विमर्श के यांत्रिक तरीके से खारिज नहीं कर सकता। बोर्ड के लिए जरूरी है कि वह दोषी के आचरण, उम्र, दोबारा अपराध करने की प्रवृत्ति और समाज में पुनर्वास की संभावनाओं से जुड़ी प्रासंगिक रिपोर्टों पर विचार करे और अपने फैसले के कारण स्पष्ट करे। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय की सिंगल बेंच आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा 25 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 1262

23 अक्टूबर 2026 को 07:14 am बजे
दोषी की समयपूर्व रिहाई याचिका खारिज करने का फैसला पहले से तय होने जैसा, रिपोर्टों का विश्लेषण नहीं किया: झारखंड हाईकोर्ट

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी

स्रोत संक्षेप

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड किसी दोषी की समयपूर्व रिहाई की याचिका को बिना उचित विचार-विमर्श के यांत्रिक तरीके से खारिज नहीं कर सकता। बोर्ड के लिए जरूरी है कि वह दोषी के आचरण, उम्र, दोबारा अपराध करने की प्रवृत्ति और समाज में पुनर्वास की संभावनाओं से जुड़ी प्रासंगिक रिपोर्टों पर विचार करे और अपने फैसले के कारण स्पष्ट करे। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय की सिंगल बेंच आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा 25 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 1262

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