आपसी सहमति से साथ रहने और अलग होने के लिखित समझौते से शादी के झूठे वादे पर रेप का आरोप साबित करना मुश्किल: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि जब दो वयस्क आपसी सहमति से लिखित समझौते के तहत साथ रहते हैं। बाद में एक अन्य लिखित समझौते के जरिए अलग होने का फैसला करते हैं तो शादी के झूठे वादे के आधार पर रेप का आरोप साबित करना मुश्किल हो जाता है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी पूर्व लिव-इन पार्टनर से रेप के आरोपी व्यक्ति को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए की। जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चला संबंध, उनका साथ

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि जब दो वयस्क आपसी सहमति से लिखित समझौते के तहत साथ रहते हैं। बाद में एक अन्य लिखित समझौते के जरिए अलग होने का फैसला करते हैं तो शादी के झूठे वादे के आधार पर रेप का आरोप साबित करना मुश्किल हो जाता है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी पूर्व लिव-इन पार्टनर से रेप के आरोपी व्यक्ति को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए की। जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चला संबंध, उनका साथ
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