महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून का पहला मामला दर्ज, ब्रिटिश नागरिक पर केस
महाराष्ट्र में धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 लागू होने के बाद पहला मामला पुणे में दर्ज किया गया है, जिसमें एक ब्रिटिश नागरिक पर आरोप है कि उन्होंने एक चर्च में प्रवचन के दौरान लोगों का धर्म बदलने की कोशिश की। इस मामले में पुलिस ने ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ केस दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।

सौजन्य से:- एबीपी न्यूज़
महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून के तहत पहला केस दर्ज, ब्रिटिश नागरिक पर FIR
हिंदी में महाराष्ट्र समाचार: महाराष्ट्र में धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 अब कानून बन गया है. इस कानून के तहत पहला केस पुणे में एक ब्रिटिश नागरिक पर दर्ज किया गया है.
महाराष्ट्र विधानसभा में हाल ही में महाराष्ट्र धर्म रक्षा अधिनियम कानून पास हुआ है. इस कानून के तहत पहला केस पुणे के खड़क पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है. ब्रिटेन से आए धार्मिक नेता पुणे के गुरुवर पेठ के एक चर्च में प्रवचन दे रहे थे. हालांकि, हिंदुत्व संगठनों ने आरोप लगाया कि इस प्रवचन के ज़रिए लोगों का धर्म बदलने की कोशिश की जा रही है और पुलिस में शिकायत की.
इसके बाद इस व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जो ब्रिटिश नागरिक है. बीती 9 अगस्त को ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ पुणे के खड़क पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है. इसकी शिकायत 7 अगस्त को पुणे में हुई घटना लेकर की गई है. FIR आप्रवासन और विदेशी अधिनियम, 2025 की धारा 23(बी) के तहत दर्ज की गई है.
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महाराष्ट्र विधानसभा में पास हुआ विधेयक
महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार देर रात तगड़ी बहस के बाद धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 पारित किया गया. सत्तारूढ़ महायुति सरकार ने गैरकानूनी और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए विधेयक की जरूरत पर जोर दिया था. 30 जुलाई को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस बिल को नोटिफाई कर दिया गया है.
महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2026 क्या है?
बता दें कि महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 विधेयक में सामान्य मामलों में 7 साल तक की जेल और 1-5 लाख रुपये जुर्माना,महिला/नाबालिग/एसी-एसटी मामलों में 10 साल तक जेल और 7 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है. धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा, और बाद में घोषणा भी. अवैध धर्मांतरण से हुई शादी निरस्त मानी जा सकती है. विधानसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक पारित करने के लिए विधान परिषद को भेजा गया था.
दोनों सदनों में पास होने के बाद इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद नोटिफाई कर दिया गया है. जिसके बाद यह बिल अब कानून बन गया है. नए प्रावधानों के तहत अगर कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी दूसरे धर्म में शामिल होना चाहता है तो उसे 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित में जानकारी देनी होगी.
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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