महाराष्ट्र विधानसभा में विवादित बयान पर हंगामा, NCP विधायक की सफाई
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा के दौरान एनसीपी विधायक के एक बयान पर विधानसभा में भारी हंगामा हुआ. एनसीपी विधायक ने अब अपनी सफाई दी है. इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी अलग-अलग राय रखी.

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Maharashtra: 'भारत में लागू हो कुरान के कानून, तो दिक्कत नहीं', NCP विधायक के बयान पर हुआ हंगामा, अब दी सफाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 25 Jun 2026 03:22 PM IST
सार
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता, बहुविवाह और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर तीखी बहस हुई। भाजपा, समाजवादी पार्टी और एनसीपी नेताओं ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रखी। इसी दौरान एनसीपी नेता ने सदम में एक ऐसी बात कह दी जिससे विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। पढ़ें पूरी खबर...
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विस्तार
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC), बहुविवाह और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। इस मुद्दे पर भाजपा विधायक देवयानी फरांदे, समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी और NCP विधायक सना मलिक ने अपनी अलग-अलग राय रखी। इस चर्चा के दौरान सना मलिक के एक बयान पर विधानसभा में भारी बवाल हो गया, जिस पर अब उन्होंने अपनी सफाई दी है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस विवाद की शुरुआत मंगलवार को हुई जब नासिक से भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि बहुविवाह और तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए यह कानून बहुत जरूरी है। फरांदे ने नासिक के उन मामलों का जिक्र किया जहां महिलाओं को उनके पतियों ने तीन तलाक के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने इन मामलों में कार्रवाई तो की है, लेकिन महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के लिए ठोस कानून की जरूरत है। फरांदे ने कहा कि गोवा, असम और उत्तराखंड की तरह महाराष्ट्र को भी यूसीसी की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देश किसी की निजी राय से नहीं बल्कि संविधान से चलता है। सरकार ने भी इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए एक कमेटी बनाने का संकेत दिया है।
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एसपी के नेता अबू आजमी ने मांग का किया विरोध
वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने सरकार पर ध्रुवीकरण करने और विकास के बजाय मुस्लिमों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। आजमी ने कहा कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए और किसी खास समुदाय को चुनकर निशाना नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने शादी जैसे निजी धार्मिक मामलों में सरकार के दखल को गलत बताया।
कैसे बढ़ा विवाद?
बुधवार को बहस तब और तेज हो गई जब एनसीपी विधायक सना मलिक ने चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहुविवाह की अनुमति है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कुरान के अनुसार कानून लागू हैं। अगर भारत में भी ऐसा हो तो कोई दिक्कत नहीं होगी। इस्लाम में हम वही मानते हैं जो कुरान में कहा गया है। अगर कुरान में कोई बात लिखी है और पाकिस्तान ने उसे लागू किया है, तो भारत भी उसे लाए। हम इसकी मांग करते है। उनके इस बयान पर भाजपा मंत्री नितेश राणे ने कड़ी आपत्ति जताई। राणे ने कहा कि सना मलिक शायद भूल गई हैं कि वह एक हिंदू बहुल देश में विधायक हैं, न कि पाकिस्तान की संसद में।
ये भी पढ़ें: Politics: कौन हैं पूर्व आईएएस सुजाता कार्तिकेयन? जिन्होंने थामा बीजेडी का हाथ; नवीन पटनायक ने दिलाई सदस्यता
विवाद बढ़ने के बाद सना मलिक ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान को भारतीय मुसलमानों के लिए कोई आदर्श नहीं मानतीं। उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र सिर्फ इसलिए किया क्योंकि सदन में पहले देवयानी फरांदे ने उसका संदर्भ दिया था। सना मलिक ने कहा कि भारतीय मुसलमानों का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संविधान नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और मौजूदा कानून के तहत बहुविवाह की अनुमति है।
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
इस विवाद की शुरुआत मंगलवार को हुई जब नासिक से भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि बहुविवाह और तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए यह कानून बहुत जरूरी है। फरांदे ने नासिक के उन मामलों का जिक्र किया जहां महिलाओं को उनके पतियों ने तीन तलाक के लिए मजबूर किया।
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उन्होंने कहा कि पुलिस ने इन मामलों में कार्रवाई तो की है, लेकिन महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के लिए ठोस कानून की जरूरत है। फरांदे ने कहा कि गोवा, असम और उत्तराखंड की तरह महाराष्ट्र को भी यूसीसी की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देश किसी की निजी राय से नहीं बल्कि संविधान से चलता है। सरकार ने भी इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए एक कमेटी बनाने का संकेत दिया है।
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एसपी के नेता अबू आजमी ने मांग का किया विरोध
वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने सरकार पर ध्रुवीकरण करने और विकास के बजाय मुस्लिमों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। आजमी ने कहा कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए और किसी खास समुदाय को चुनकर निशाना नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने शादी जैसे निजी धार्मिक मामलों में सरकार के दखल को गलत बताया।
कैसे बढ़ा विवाद?
बुधवार को बहस तब और तेज हो गई जब एनसीपी विधायक सना मलिक ने चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहुविवाह की अनुमति है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कुरान के अनुसार कानून लागू हैं। अगर भारत में भी ऐसा हो तो कोई दिक्कत नहीं होगी। इस्लाम में हम वही मानते हैं जो कुरान में कहा गया है। अगर कुरान में कोई बात लिखी है और पाकिस्तान ने उसे लागू किया है, तो भारत भी उसे लाए। हम इसकी मांग करते है। उनके इस बयान पर भाजपा मंत्री नितेश राणे ने कड़ी आपत्ति जताई। राणे ने कहा कि सना मलिक शायद भूल गई हैं कि वह एक हिंदू बहुल देश में विधायक हैं, न कि पाकिस्तान की संसद में।
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विवाद बढ़ने के बाद सना मलिक ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान को भारतीय मुसलमानों के लिए कोई आदर्श नहीं मानतीं। उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र सिर्फ इसलिए किया क्योंकि सदन में पहले देवयानी फरांदे ने उसका संदर्भ दिया था। सना मलिक ने कहा कि भारतीय मुसलमानों का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संविधान नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और मौजूदा कानून के तहत बहुविवाह की अनुमति है।
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