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सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिकता के आधार पर धारा 376 के दोषी ठहराव को रद्द किया, वकील के डेटा पर कार्रवाई में स्थगन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल अनैतिकता के आरोप पर, ठोस प्रमाण के बिना किसी को बलात्कार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिससे निचली अदालत और हाई कोर्ट के निर्णय निरस्त हुए। साथ ही, कोर्ट ने जीएसटी अधिकारियों को वकील पुनीत बत्रा के कार्यालय से जब्त डेटा का विश्लेषण 28 सितंबर तक न करने और तत्काल कोई कठोर कदम न उठाने का निर्देश दिया।

25 सितंबर 2026 को 09:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिकता के आधार पर धारा 376 के दोषी ठहराव को रद्द किया, वकील के डेटा पर कार्रवाई में स्थगन

सौजन्य से:- Hindustan

केवल किसी काम को अनैतिक मानकर सजा नहीं दे सकते, रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि धारा 376 के तहत दोषी ठहराने का निचली अदालत का फैसला पूरी तरह गलत था, और उच्च न्यायालय ने भी इसे मानकर गलती की। इसने निचली अदालत और एचसी के फैसले को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के मामले में 10 साल की सजा पाने वाले व्यक्ति को शुक्रवार को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सिर्फ किसी काम के अनैतिक होने के आधार और बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जज उज्ज्वल भुइयां और जज अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने कथित पीड़िता के बयान को बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं बताया। बेंच ने कहा कि उसके बयान को आंशिक रूप से स्वीकार और आंशिक रूप से अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

पीठ ने उस व्यक्ति की अपील पर फैसला सुनाया, जिसने लुधियाना की निचली अदालत की ओर से उसे दोषी ठहराने व सजा सुनाए जाने के फैसले को बरकरार रखने के पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के सितंबर 2013 के निर्णय को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि धारा 376 के तहत दोषी ठहराने का निचली अदालत का फैसला पूरी तरह गलत था, और उच्च न्यायालय ने भी इसे मानकर गलती की। इसने निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया। साथ ही, कहा कि अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 376 के तहत लगे आरोपों से मुक्त किया जाता है।

वकील के ऑफिस की तलाशी के मामले में सुनवाई

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जीएसटी अधिकारियों से कहा कि वे वकील पुनीत बत्रा के कार्यालय से जब्त किए गए डेटा का 28 सितंबर तक विश्लेषण न करें। जज दीपांकर दत्ता और जज शील नागू की पीठ ने कहा कि सोमवार तक बत्रा के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाए। बत्रा ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि अगर किसी वकील के अपराध में शामिल होने के प्रथमदृष्टया सबूत हों तो जांच एजेंसियां उसके कार्यालय की तलाशी ले सकती हैं। बत्रा की ओर से वकील हरिहरन ने बताया कि जांच एजेंसी ने उन्हें 28 सितंबर को पेश होने के लिए समन भेजा है। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई सोमवार को करने की बात कही।

जीएसटी अधिकारियों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी फिलहाल केवल जब्त डेटा का विश्लेषण कर रही है। उन्होंने कहा कि यह वकील और मुवक्किल के बीच गोपनीय जानकारी से जुड़ा मामला नहीं है। वहीं, पीठ ने कहा कि जांच से जुड़े तथ्य अधिकारियों को पता हैं, लेकिन अदालत के पास अभी पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए सोमवार तक कोई कार्रवाई न की जाए।

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