ब्रीजभूषण शरण सिंह के खिलाफ फिर चार महिला पहलवानों ने दायर की अपील, निचली अदालत के सबूत‑नज़रअंदाज़ी को चुनौती
चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें वे ब्रीजभूषण शरण सिंह और सह-अभियुक्त विनोद तोमर को यौन शोषण मामले में बरी करने वाले निचली अदालत के फैसले को उलटने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि निचली अदालत ने सबूतों का चयनात्मक आकलन किया, अनुमान‑अटकलों पर फैसला किया और पीड़िताओं की चुप्पी को संदेह का कारण माना। यह याचिका 26 सितंबर को स्पेशल जज दिग्विनय सिंह की अदालत में सुनी जाएगी।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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बृजभूषण के खिलाफ फिर 4 महिला पहलवान कोर्ट पहुंचीं:बोलीं- निचली अदालत ने सबूत नजरअंदाज किए, पूर्व सांसद 53 दिन पहले बरी हुए थे
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भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को यौन शोषण केस में चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपील दाखिल की है।
पहलवानों ने 53 दिन पहले आए लोअर कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण और सह आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था। मामले की सुनवाई शनिवार, 26 सितंबर को स्पेशल जज दिगविनय सिंह की अदालत में होगी।
यह मामला 2023 में सामने आया था। 6 महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसमें एक नाबालिग थी। FIR नहीं होने पर पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद अप्रैल 2023 में FIR दर्ज की गई। बाद में नाबालिग पहलवान ने शिकायत वापस ले ली थी।
दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। 3 अगस्त 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को यौन शोषण केस से बरी कर दिया था।
जब बृजभूषण बरी हुए तो जश्न मनाया था…
याचिका में महिला पहलवानों ने ये तर्क गिनाए…
फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित: महिला पहलवानों ने याचिका में कहा कि निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसमें रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का स्पष्ट रूप से गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। निचली अदालत का फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है। इसमें कानून के स्थापित और बाध्यकारी सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया।
सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन नहीं: फैसले में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित’ व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया, जबकि पीड़िताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन किया जाना चाहिए था।
पीड़िताओं की लंबी चुप्पी को संदेह के रूप में देखा: ACJM ने अपने फैसले में पीड़िताओं की लंबे समय तक चुप्पी, आरोपी के साथ उनके लगातार मधुर संबंध और बयानों में विरोधाभास को अभियोजन पक्ष के मामले पर संदेह पैदा करने वाले आधार के रूप में देखा था। अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद कई तस्वीरों से पता चलता है कि आरोपी को पीड़िताओं ने पारिवारिक कार्यक्रमों और शादी समारोहों में भी आमंत्रित किया था।
करियर को नुकसान पहुंचने का डर रहा होगा : अदालत ने यह भी कहा था कि यह बात समझ में आती है कि तत्कालीन WFI अध्यक्ष होने के नाते सिंह के खिलाफ शिकायत करने पर महिला पहलवानों को अपने करियर को नुकसान पहुंचने का डर रहा होगा। हालांकि, अदालत के मुताबिक यह समझना मुश्किल था कि इसके बावजूद उन्होंने वर्षों तक सिंह के साथ मधुर संबंध क्यों बनाए रखे।
पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था- हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है
बृजभूषण को बरी किए जाने पर विनेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था- "हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं। पर कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहीं।
हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना। शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।"
अब यौन शोषण केस को जानिए…
2 जुलाई, 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में कुल 1133 दिनों में 127 सुनवाई हुईं। 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बृजभूषण 20 जुलाई, 2023 से नियमित जमानत पर थे। 10 मई, 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ था।
3 अगस्त को कोर्ट ने बृजभूषण को बरी कर दिया। फैसले के बाद बृजभूषण ने कहा-
जज ने कहा कि बृजभूषण और विनोद तोमर आप लोगों को बाइज्जत बरी किया जाता है। मैंने पहले कहा था कि अगर कोई आरोप साबित हो जाएगा तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। मेरे लिए खुशी का दिन है। होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
दिल्ली पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया था केस
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करना), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना/स्टॉकिंग) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। तोमर के खिलाफ IPC की धारा 109 (उकसाने/सहायता करने) भी लगाई गई थी।
महिला पहलवानों ने सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित घटनाएं 2016 से 2019 के बीच WFI कार्यालय, बृजभूषण सिंह के आधिकारिक आवास और विदेशों में हुई थीं। हालांकि, एक नाबालिग महिला पहलवान की ओर से सिंह के खिलाफ दर्ज POCSO मामले में पुलिस ने क्लोजर/कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी।
पढ़िए निचली अदालत ने फैसले में क्या कहा था…
पीड़ित पहलवानों का लंबे समय तक चुप रहना, आरोपी के साथ लगातार अच्छे रिश्ते बनाए रखना, बयानों में विरोधाभास होना—ऐसी बातें हैं जो सरकारी पक्ष के दावे पर संदेह पैदा करती हैं।
अदालत ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसी कई तस्वीरें मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि आरोपी बृजभूषण शरण सिंह को पहलवानों के पारिवारिक कार्यक्रमों और शादियों तक में बुलाया गया था।
कोर्ट ने यह तो माना था कि बृजभूषण के WFI अध्यक्ष रहते हुए महिला पहलवानों को करियर खराब होने का डर हो सकता था, लेकिन यह बात समझ से परे है कि उन्होंने सालों तक उनके साथ दोस्ताना और अच्छे संबंध क्यों बनाए रखे।
इन आधारों पर ACJM अदालत ने कहा था कि पुलिस आरोपों को पूरी तरह साबित करने में नाकाम रही, इसलिए बृजभूषण सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A और 506(1) के तहत बरी कर दिया गया। साथ ही, पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी बरी कर दिया गया।
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