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ट्रंप ने रूस और ईरान पर व्यापक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध लागू किए। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस आयात करने वाले देशों, जैसे चीन और भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिला है, तथा शैडो फ्लीट तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोगियों पर भी प्रतिबंध लागू होते हैं।

19 सितंबर 2026 को 03:04 am बजे
ट्रंप ने रूस और ईरान पर व्यापक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए

सौजन्य से:- ETV Bharat

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए

इस एक्ट का मकसद रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर के साथ-साथ मॉस्को के डिफेंस इंडस्ट्री में शामिल सहयोगियों पर भी प्रतिबंध लगाना है.

By PTI

Published : September 19, 2026 at 7:30 AM IST

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस कानून का मकसद रूस और उससे बड़ी मात्रा में एनर्जी खरीदने वाले देशों, जैसे चीन और भारत पर भारी शुल्क (टैरिफ) लगाना है. बता दें, इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिला है.

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को राष्ट्रपति ने H.R. 5334, यानी 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पर हस्ताक्षर करके उसे कानून बना दिया. यह कानून रूस पर कानूनी प्रतिबंधों, टैरिफ और रोक को मंजूरी देता है और उनका दायरा बढ़ाता है. इसके साथ ही ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों की अवधि भी बढ़ाता है. इससे पहले बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला एक्ट' पास किया.

इस एक्ट का मकसद रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर के साथ-साथ मॉस्को के डिफेंस इंडस्ट्री और उसके तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) में शामिल सहयोगियों पर भी प्रतिबंध लगाना है. यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं. यह कानून ट्रंप को इसे लागू करने के मामले में काफी अधिकार देता है, जिसमें यह तय करना शामिल है कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए, टैरिफ की दरें क्या हों और क्या प्रतिबंधों के प्रावधानों में छूट दी जाए.

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाता है. इसके तहत, कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है. अगर किसी देश का रूस से गैस का आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा है और उसने उस आयात को कम करने के लिए 'महत्वपूर्ण कदम' उठाए हैं, तो उसे गैस से जुड़े शुल्क से छूट मिलती है.

यह कानून रूस के 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) और रूस के ऊर्जा उत्पादन में मदद करने या प्रतिबंधों से बचने में शामिल अन्य विदेशी लोगों को निशाना बनाता है. इनमें जहाज के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, बीमा करने वाले और इन गतिविधियों में शामिल अन्य पक्ष शामिल हैं.

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