अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने दी मुहर, दोषियों के परिवार सुप्रीम कोर्ट जाने की कर रहे तैयारी
गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा, 38 दोषियों को मौत और 11 को उम्रकैद की सजा हुई थी. दोषियों के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट; गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले पर लगाई मुहर, परिजन बोले-सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
सरायमीर थाना क्षेत्र में वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के मामले में 38 दोषियों को मौत और 11 को उम्रकैद की सजा हुई थी.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 7:59 AM IST
आजमगढ़ : गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सरायमीर थाना क्षेत्र में वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के मामले में सभी 38 दोषियों को दी गई मौत की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा बकरार रखी है. मंगलवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाया. फैसले के बाद आजमगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया. वहीं, स्थानीय स्तर पर इस मामले पर कोई भी बोलने से बचता रहा.
वर्ष 2008 में गुजरात के अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी. जांच एजेंसियों के अनुसार इस साजिश का मास्टरमाइंड आजमगढ़ के सरायमीर थाना क्षेत्र के बीनापार निवासी अबुल बशर था. इसके अलावा सरायमीर क्षेत्र के संजरपुर निवासी मोहम्मद सैफ, आरिफ मिर्जा नसीम, इसरौली निवासी आरिफ बदर व शहर कोतवाली क्षेत्र के बदरका निवासी सैफुल रहमान के नाम भी सामने आए थे. मंगलवार को फैसले के बाद संजरपुर और आसपास के गांवों में सन्नाटा पसरा रहा. अधिकांश परिजनों ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.
सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर निवासी आरोपी मोहम्मद सैफ के पिता शादाब अहमद उर्फ मिस्टर ने कहा कि उनका परिवार इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेगा. उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्हें अब भी न्याय मिलने की उम्मीद है और वे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.
इसरौली निवासी आरोपी आरिफ बदर के पुत्र मोहम्मद माविया ने बताया कि वर्ष 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद से परिवार की मुलाकात नहीं हो सकी है. सप्ताह में एक बार वीडियो कॉल और दो बार वॉइस कॉल पर ही बातचीत हो पाती है. लॉकडाउन से पहले परिवार के सदस्य गुजरात जाकर मुलाकात करते थे, लेकिन उसके बाद ऐसा संभव नहीं हो पाया.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बारिश की बाधा नहीं: मेरठ के शास्त्रीनगर में सैटबैक प्रकरण के विरोध में जारी महिलाओं का धरना

गर्भवती IPS अधिकारियों को प्रशिक्षण से रोकने वाले नियम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के लिए विशेष अदालत अगस्त में होगी

फ्रांस के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मरीन ले पेन को गबन का दोषी पाया गया, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का आदेश

विकास कार्य समय पर पूरे करें, कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं होगा

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जमीन हड़पने के मामले में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच रद्द करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट जेपी अग्रवाल और सुदीप्ति हजेला की ड्रेसेज टीम के गैर-चयन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तदर्थ शिक्षकों को 1990 से नियमितीकरण दिया, वरिष्ठता का लाभ भी मिलेगा
ताज़ा ख़बरें
- प्रभारी मंत्री का निर्देश: समय पर पूरे हों विकास कार्य, कानून-व्यवस्था में लापरवाही न बरतें
- सुप्रीम कोर्ट में नए नियम: जज करेंगे कार पूलिंग, स्टाफ को मिलेगा वर्क फ्रॉम होम
- सुप्रीम कोर्ट का डीएमके को झटका, करूर भगदड़ पर मुख्यमंत्री के बयान पर रोक लगाने से मना
- सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद डीएमके ने वापस ली याचिका
- कांवड़ यात्रा: पुलिस-प्रशासन से शांतिपूर्ण कानून व्यवस्था की अपील
- फ्रांसीसी अदालत से मरीन ले पेन को बड़ी राहत, लेकिन स्वतंत्रता पर शर्तें
- फैंटम स्टूडियोज ने जियोस्टार इंडिया पर 250 करोड़ का मुकदमा किया
- राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करो, देशव्यापी विश्वास बढ़ेगा: अशोक गहलोत

