सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद अफसरों की मनमानी जारी
उत्तर प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की प्राचार्य भर्ती में अफसरों की मनमानी जारी है, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद नए आयोग ने पुराने चयन सूची के आधार पर नियुक्तियों की कोशिश की जो कानून के खिलाफ है।

सौजन्य से:- Hindustan
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती पर भी अफसरों की मनमानी
प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की प्राचार्य भर्ती 2019 में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के अफसर मनमानी पर आमादा हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने अधिकारियों के आचरण पर नाराजगी जताई है। नए आयोग ने पुराने चयन सूची के आधार पर नियुक्तियों की कोशिश की, जो कानून के खिलाफ है।
प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की प्राचार्य भर्ती 2019 में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के अफसर मनमानी पर आमादा हैं। मेरठ कॉलेज के प्राचार्य नियुक्ति विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई के अपने फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के रवैए पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव से ऐसे अधिकारियों के आचरण की जांच करने पर विचार करने की बात कही थी, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष ऐसा हलफनामा दाखिल किया जो कानून के अनुरूप नहीं था।
भर्ती विवाद और उच्च शिक्षा विभाग
डॉ. मनोज कुमार रावत की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका में शीर्ष अदालत ने कहा था कि 21 अगस्त 2023 को नया उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 लागू होने के बाद पुराने अधिनियम के तहत तैयार चयन सूची के आधार पर कोई कार्रवाई या नियुक्ति करना कानून सम्मत नहीं था। इसके बावजूद अधिकारियों ने पुराने पैनल को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जो विधि विपरीत था।
आगरा कॉलेज के प्राचार्य का मामला
ऐसा ही मामला 2019 की प्राचार्य भर्ती में चयनित आगरा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ला का है जिन्हें नवगठित आयोग ने उनका चयन निरस्त कर दिया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने 21 जुलाई को अपने आदेश में कहा है कि यह गंभीर विचार का विषय है कि वर्ष 2023 के अधिनियम के तहत गठित नए आयोग ने कहीं ऐसे अधिकारों का प्रयोग तो नहीं किया, जो पुराने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के समाप्त होने के साथ ही खत्म हो चुके थे। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि नई नियुक्ति वैधानिक प्रावधानों और आयोगों के अधिकार क्षेत्र के विपरीत हो सकती है।
चयन आयोग से विवादित विज्ञापन
यही नहीं 21 जुलाई को चयन आयोग से जारी प्राचार्य के 111 पदों के विज्ञापन पर भी आपत्ति उठी है। राजेन्द्र प्रसाद डिग्री कॉलेज बरेली की प्रबंध समिति ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को पत्र लिखकर एक जुलाई 2024 से रिक्त प्राचार्य का पद नए विज्ञापन में शामिल नहीं करने पर आपत्ति जताई है। इस मामले में भी 2019 के विज्ञापन में चयनित एक अभ्यर्थी की तैनाती की तैयारी चल रही है जिसके कारण रिक्त पद की सूचना नहीं भेजी गई है।
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