डिजिटल मीडिया के लिए नए कानून की तैयारी
दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि डिजिटल मीडिया का स्वरूप पारंपरिक मीडिया से अलग है, इसलिए डिजिटल मीडिया के लिए अलग नियामक ढांचे की जरूरत है। सरकार ने आईटी रूल्स, 2021 में संशोधन का मसौदा जारी किया है, जिसमें डिजिटल मीडिया की निगरानी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और एआई से तैयार सामग्री की पहचान जैसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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डिजिटल मीडिया के लिए अलग नियामक ढांचे की जरुरत : दिल्ली हाई कोर्ट
हाल ही में एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि डिजिटल मीडिया का स्वरूप पारंपरिक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से काफी अलग है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से समाचार कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में गलत या अपुष्ट जानकारी के दुष्परिणाम भी तेजी से सामने आते हैं। अदालत ने कहा कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था बदलते डिजिटल परिवेश की सभी चुनौतियों का पर्याप्त समाधान नहीं करती। इसलिए संसद को ऐसा विधायी ढांचा तैयार करने पर विचार करना चाहिए जो डिजिटल मीडिया में पेशेवर मानकों, जवाबदेही और नैतिकता को सुनिश्चित करे।अदालत से सोशल मीडिया तक: क्यों बढ़ रहा है कानूनी कार्यवाही का ‘डिजिटल हथियार’ बनना? इस बारे में क्या कहते हैं कानून
फिलहाल भारत में कौन-से डिजिटल कानूनी प्रावधान लागू हैं?
इस समय डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन न्यूज़ पब्लिशर्स पर मुख्य रूप से लागू होने वाले कानून हैं, जिनके बारे में सरकार का कहना है कि इन कानूनों का उद्देश्य इंटरनेट को सुरक्षित, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाना है...1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम , 2000 (IT Act, 2000)
दरअसल, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत सरकार का मुख्य साइबर कानून है। इस कानून के प्रावधानों को 17 अक्टूबर 2000 को लागू किया गया था। मूलरुप से यह कानून डिजिटल दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन (ई-कॉमर्स), और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देता है। इसके साथ ही यह साइबर अपराधों को रोकता है और उनके लिए सजा तय करता है।2. सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021
इसके प्रावधानों को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा साल 2021 अधिसूचित किया गया था। Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के नियम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया प्रकाशकों के लिए एक आचार संहिता और सख्त शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करते हैं ।3. Digital Personal Data Protection Act, 2023
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2023 , नागरिकों की डेटा सुरक्षा से जुड़े मामलों को नियंत्रित करता है। देखा जाए तो डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 (DPDP Act) भारत का पहला ऐसा बड़े स्तर पर लागू हुआ कानूनी प्रावधान है जो देश के नागरिकों की निजी डिजिटल जानकारी की रक्षा करता है। इस कानून क प्रावधान यह तय करते हैं कि आपकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, मोबाइल नंबर, और ईमेल सुरक्षित रहें। कंपनियां भी आपकी सहमति के बिना और सही उद्देश्य के बिना इसका इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।क्या नए डिजिटल कानूनों की तैयारी हो रही है?
गौर करने वाली बात है कि सरकार ने इसी साल 2026 में आईटी रूल्स, 2021 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें डिजिटल मीडिया की निगरानी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री की पहचान जैसे कई प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। हालांकि अभी ये अंतिम कानून नहीं हैं, बल्कि मसौदा हैं जिन पर हितधारकों से सुझाव लिए गए हैं।संभल जाएं..Facebook या सोशल मीडिया पोस्ट से मानहानि केस बनता है.. इससे जुड़े कानून क्या हैं और क्या मिलती है सजा
डिजिटल कानूनों में संभावित बदलाव क्या हो सकते हैं?
देखा जाए तो इस मामले में सरकार की गंभीरता और अदालतों की गाईडलाइन्स से यदि ये संशोधन लागू होते हैं, तो डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई नई जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। मसलन..- AI और डीपफेक पर सख्ती : सरकार चाहती है कि AI या सिंथेटिक तरीके से तैयार की गई सामग्री की स्पष्ट पहचान हो। कुछ प्रस्तावों में यह भी कहा गया है कि ऐसे लेबल पूरे वीडियो या दृश्य सामग्री के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही : सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को सरकारी निर्देशों, सलाह और स्पष्टीकरणों का पालन अधिक प्रभावी ढंग से करना पड़ सकता है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की संभावना भी बढ़ सकती है।
- डिजिटल मीडिया की निगरानी : प्रस्तावित संशोधनों में डिजिटल मीडिया ओवरसाइट (Digital Media Oversight) को मजबूत करने की बात कही गई है, जिससे ऑनलाइन न्यूज़ प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल प्रकाशकों की जवाबदेही बढ़ सकती है।
- OTT प्लेटफॉर्म पर भी लगाम संभव: हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि सरकार आईटी नियमों में संशोधन कर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड CBFC की मंजूरी अनिवार्य करने पर विचार कर सकती है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
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