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हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला पर दुष्कर्म, सजा समाप्ति के बाद भी बंदी का कारण कोर्ट ने पूछा

हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला के विरुद्ध दुष्कर्म के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और हाईकोर्ट ने पूछताछ की कि सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया। राज्य सरकार ने बताया कि विदेश मंत्रालय को पत्राचार जारी है, जबकि अदालत ने केंद्र के अधिवक्ता से जवाब देने को कहा।

6 अक्टूबर 2026 को 08:06 am बजे
हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला पर दुष्कर्म, सजा समाप्ति के बाद भी बंदी का कारण कोर्ट ने पूछा

सौजन्य से:- Hindustan

हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से रेप; अदालत ने पूछा- सजा पूरी होने के बाद भी क्यों नहीं छोड़ा

हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से रेप मामले में तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए हैं। हाई कोर्ट ने सवाल पूछा है कि सजा पूरी होने के बाद भी महिला को क्यों नहीं छोड़ा गया?

झारखंड में हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रखी गई बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म मामले में तीन सिपाहियों पर एफआईआर दर्ज कर तीनों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। कोर्ट में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से पेश सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला से तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म का उल्लेख है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। अदालत ने प्रार्थी से राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर प्रत्युत्तर मांगा है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय को पत्राचार किया जा रहा है। हालांकि, अब तक जवाब नहीं मिला है। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से जवाब दाखिल करने को कहा।

बता दें कि हाईकोर्ट में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने रिट याचिका में बताया कि लोहसिंघना थाने से संबंधित मामले में महिला कोर्ट से बरी होने के बावजूद महिला डिटेंशन सेंटर में पड़ी है। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने डिटेंशन सेंटर में वर्ष 2020 से 2022 के बीच उससे दुष्कर्म किए जाने की बात कही थी।

2018 में दर्ज हुए थे दो मामले

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज किए गए थे। इनमें एक बच्चे के अपहरण और दूसरा विदेशी अधिनियम से जुड़ा था। अपहरण केस में महिला को दो साल की सजा हुई थी, जबकि वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में उसे तीन साल की सजा हुई। सजा के बाद महिला को डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। वह वर्ष 2025 में वहां से भाग गई थी। इसके बाद उसपर विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में उसे बरी कर दिया गया।

सजा पूरी होने के बाद भी नहीं छोड़ा

सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला को लंबे समय तक हिरासत में रखने पर सवाल उठाए। अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में तीन साल की सजा हुई थी तो सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया? डिटेंशन सेंटर में रखने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने यह भी सवाल किया कि वर्ष 2025 में महिला के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत दोबारा मामला दर्ज किया गया, जबकि वर्ष 2026 में वह उस मामले में बरी हो चुकी है। बरी करने के आदेश के खिलाफ सरकार ने अपील क्यों नहीं की?

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