पटियाला हाउस कोर्ट ने 17 छात्रों‑पत्रकारों को शर्तों के साथ जमानत दी, पुलिस पर हमले को चिंताजनक कहा
मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में गिरफ्तार हुए 17 छात्रों और पत्रकारों को कोर्ट ने जमानत दी, यह कहा कि वे आदतन अपराधी नहीं हैं और शर्तों के साथ रिहा किए जाएँ। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता देते हुए पुलिस पर हुए हमले को गंभीर चिंता का विषय बताया। जमानत की शर्तों में साक्ष्यों में छेड़छाड़ न करना, पता‑मोबाइल अपडेट रखना और हर सुनवाई में उपस्थित होना शामिल है।

सौजन्य से:- Hindustan
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में पुलिस पर हमले को अदालत ने बताया चिंताजनक, 17 को शर्तों संग बेल
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में गिरफ्तार 17 छात्रों और पत्रकारों को शर्तों के साथ जमानत दे दी है। अदालत ने पुलिस पर हमले को गंभीर माना लेकिन…
निखिल पाठक, नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों और स्वतंत्र पत्रकारों समेत 17 लोगों को पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने जेल प्रशासन को प्रदर्शन के दौरान घायल हुए आरोपियों को चिकित्साधिकारी की सलाह के अनुसार जरूरी इलाज उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिमेष कुमार की कोर्ट ने चार अलग-अलग आदेशों में सभी 17 आरोपियों को जमानत दी।
आरोपी आदतन अपराधी नहीं
अदालत ने कहा कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत जरूरी नहीं है तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी गौर किया कि बीएनएस की धारा 132 को छोड़कर बाकी धाराओं के तहत लगाए गए अपराध जमानती प्रकृति के हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी आदतन अपराधी नजर नहीं आते और उनका पूरा भविष्य उनके सामने है। ऐसे में उन्हें शर्तों के साथ जमानत दी जानी चाहिए। सभी को समान राशि के एक जमानती के साथ निजी मुचलका भरना होगा।
विरोध का अधिकार लेकिन पुलिस पर हमले चिंताजनक
अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने के अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन पुलिसकर्मियों पर हमले चिंताजनक हैं। आरोप गंभीर हैं और पुलिसकर्मी के घायल होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही अदालत ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट को गंभीर चिंता का विषय बताया।
क्या लगाईं शर्तें?
अदालत ने आरोपियों को जमानत देते हुए शर्तें भी लगाईं। अदालत ने आरोपियों को मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित, धमकाने या प्रलोभन देने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया। आरोपियों को अपना सही स्थायी और वर्तमान पता व चालू मोबाइल नंबर देना होगा। उन्हें हर सुनवाई में पेश होना होगा और अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकेंगे। शर्तों के उल्लंघन पर जांच एजेंसी जमानत रद्द कराने की मांग कर सकती है।
इन धाराओं में केस
मामला संसद मार्ग थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 221, 132, 190, 191(2) और 3(5) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा तीन के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप था कि आरोपी गैरकानूनी जमावड़े में शामिल थे, सार्वजनिक रास्ता बाधित किया, पुलिसकर्मियों से हाथापाई की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने मांगी थी 14 दिन की न्यायिक हिरासत
जांच अधिकारी ने आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की थी। पुलिस का कहना था कि आरोपी दोबारा अपराध कर सकते हैं या जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
बचाव पक्ष ने क्या दी दलील?
वहीं, बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी युवा हैं और कई छात्र शांतिपूर्ण विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे। वकीलों ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के आधार में किसी आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट नहीं की गई है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस के अनुसार करीब 50 लोग प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन केवल 17 को गिरफ्तार किया गया। कथित घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज भी अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया।
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