बरवाअड्डा में MLA जयराम महतो को मिली अग्रिम जमानत, अदालत ने लगाई कड़ी शर्तें
धनबाद के एमपी‑एमएलए कोर्ट ने जयराम कुमार महतो और तीन साथियों को सरकारी काम में बाधा और थानेदार के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में अग्रिम जमानत दी, पर हर आरोपी को प्रत्येक तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होना अनिवार्य किया गया। यदि किसी एक दिन भी अनुपस्थित रहा तो जमानत बंधपत्र रद्द किया जा सकता है; साथ ही 20,000 रुपये का बांड, दो जमानतदार, आधार‑कार्ड व मोबाइल नंबर जमा करने और बिना अनुमति मोबाइल बदलने से प्रतिबंध जैसी शर्तें भी लगाई गईं।

सौजन्य से:- Jagran
बरवाअड्डा थाना हंगामा: MLA Jairam Mahto की अग्रिम जमानत पर अदालत ने लगाईं कई शर्तें, एक गैरहाजिरी पर रद होगा बंधपत्र
MLA Jairam Mahto: बरवाअड्डा थाना में सरकारी काम में बाधा डालने और दुर्व्यवहार के मामले में विधायक जयराम कुमार महतो समेत चार आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल गई है।
जागरण संवाददाता, धनबाद। बरवाअड्डा थाना में घुसकर सरकारी काम में बाधा डालने और थानेदार के साथ दुर्व्यहार करने के मामले में झारखंड लोकतांत्रित क्रांतिकारी मोर्चा के सुप्रीमो व डुमरी के विधायक जयराम कुमार महतो समेत चार आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल गई है।
धनबाद के एमपी एमएलए कोर्ट के जज सह अपर सत्र न्यायाधीश 16 डीसी अवस्थी की अदालत ने जमानत के साथ ही जयराम कुमार महतो, सुशील मंडल उर्फ सुशील कुमार, महेंद्र साव उर्फ महेंद्र प्रसाद साव और राज कुमार मंडल को अग्रिम जमानत के लिए कई शर्तें लगा दी हैं।
अदालत ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि चारों आरोपियों को चार्ज फ्रेम होने तक प्रत्येक तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। किसी एक तारीख पर भी आरोपी के उपस्थित नहीं होने पर निचली अदालत को संबंधित आरोपी का जमानत बंधपत्र रद करने की स्वतंत्रता होगी।
अदालत ने 14 सितंबर को अग्रिम जमानत दी थी। जमानत आदेश की कापी सोमवार 21 सितंबर को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुई। इसमें जमानत की शर्तों का जिक्र है।
20-20 हजार रुपये के देने होंगे जमानत बांड
अदालत ने कहा कि चारों आरोपियों को गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में 20-20 हजार रुपये के जमानत बांड और समान राशि के दो-दो जमानतदार देने होंगे। जमानतदारों में एक आरोपी का वर्तमान पैरवीकार और दूसरा उसका करीबी रिश्तेदार का होना जरूरी है।
कोर्ट ने आरोपियों को सूचक और उसके परिवार के सदस्यों को किसी भी प्रकार से धमकी देने, परेशान करने या असुविधा पहुंचाने से भी रोक दिया है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी को अपना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर अदालत में जमा करना होगा।
मोबाइल नंबर बदलने की भी अनुमति नहीं
मुकदमा लंबित रहने के दौरान अदालत की पूर्व अनुमति के बिना मोबाइल नंबर बदलने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपियों की पहचान स्पष्ट है और उनके फरार होने या जांच से बचने का कोई आरोप नहीं है।
साथ ही ऐसा कोई विशिष्ट तथ्य सामने नहीं आया जिससे किसी हथियार या आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी अथवा किसी अन्य उद्देश्य के लिए आरोपियों की हिरासत में पूछताछ जरूरी साबित हो। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत का लाभ दिया।
22 अगस्त को बरवाअड्डा थाने में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
अभियोजन के अनुसार 22 अगस्त 2026 को बरवाअड्डा पुलिस एक मामले में गणेश दास को बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस देने गई थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा डालने के बाद गणेश दास को गिरफ्तार कर थाना के हाजत में रखा गया था।
इसके बाद पुलिस के अनुसार जयराम महतो ने पुलिस पदाधिकारी को व्हाट्सऐप ऑडियो कॉल किया। आरोप है कि रात में वह समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे, जहां पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और गिरफ्तार व्यक्ति को छुड़ाने का प्रयास किया गया। इसी आरोप को लेकर बरवाअड्डा थाना में कांड दर्ज किया गया था।
निर्वाचित प्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं
अदालत ने कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का थाना जाकर अपने क्षेत्र के व्यक्ति की गिरफ्तारी या हिरासत के संबंध में जानकारी लेना मात्र अपराध नहीं है।
हालांकि निर्वाचित प्रतिनिधि भी कानून से ऊपर नहीं है और धमकी, हमला अथवा पुलिस के वैध कार्य में जबरन बाधा डालना साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
यह भी पढ़ें- धनबाद एमपी एमएलए कोर्ट में जयराम महतो के खिलाफ सुनवाई, गवाह पेश करने का आदेश
यह भी पढ़ें- बरवाअड्डा थानेदार के साथ विवाद में MLA Jairam Mahto को बड़ी राहत, धनबाद कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 5‑दिन की अवैध हिरासत पर ₹50,000 मुआवजे का आदेश दिया, पुलिस की ईमानदार त्रुटि स्वीकारोक्ति की सराहना की

बिना लिखित कारण के गिरफ्तारी अब होगी असंवैधानिक, सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश

कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने चुनाव से पहले जेल से रिहाई हेतु हाई कोर्ट में दायर की याचिका

गिरफ्तारी के कारण न बताए जाने पर दोबारा अरेस्ट में मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया: बिना सूचना व वकील के अधिकार की उपेक्षा पर तुरन्त रिहाई

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: मुकदमा शुरू होने के बाद किसी भी मुद्दे को प्रारम्भिक रूप से नहीं सुना जा सकता

जाँच अधूरी रहने पर ‘संपूर्ण सामग्री’ के बयान से डिफ़ॉल्ट जमानत नहीं दी जा सकती, सुप्रीम कोर्ट ने कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों पर हुए हमले की CBI जांच की याचिका को खारिज कर दिल्ली पुलिस की साख की रक्षा की
ताज़ा ख़बरें
- 14 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने सौजन्या के यौन-हिंसा‑हत्याकांड की नई जांच के लिए एसआईटी का आदेश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को वित्तीय विवरण जमा करने का आदेश, लाभ‑उत्पादन पर प्रतिबंध
- सत्र न्यायालय ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची विवाद में मजिस्ट्रेट के फैसले को निरस्त किया
- दिल्ली हाईकोर्ट ने SAP को नायरा एनर्जी की सॉफ्टवेयर सेवाएँ पुनः चालू करने का निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा के लिये पील पर नोटिस जारी; गुरुग्राम दीवार ढहने की स्वतंत्र जांच का आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने धर्मस्थला के पास 2012 के बलात्कार‑हत्या मामले की नई जांच का आदेश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने मांगी मनिपुर के राहत शिविरों में 25 असहज मौतों की विस्तृत रिपोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट ने डेट रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों की जानकारी मांगी

