सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के पक्ष में दिया निर्देश, बाहरी एजेंसी पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के पक्ष में एक बड़ा निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि कानूनी पेशे की आजादी भी न्यायपालिका की आजादी जितनी ही जरूरी है और इसमें सुधार के लिए 'नेशनल लीगल एकेडमी' बनाने का सुझाव दिया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के पक्ष में एक अहम निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानूनी पेशे की आजादी न्यायपालिका की आजादी जितनी ही जरूरी है और इसे खुद ही रेगुलेट होना चाहिए । बाहरी एजेंसियां वकीलों की पेशेवर स्थिति पर नकारात्मक टिप्पणी नहीं कर सकतीं। उन्होंने वकीलों के लिए नेशनल लीगल एकेडमी बनाने का सुझाव दिया।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वकील ों के हक में बोलते हुए एक बड़ा निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे की आजादी भी न्यायपालिका की आजादी जितनी ही जरूरी है और इसे खुद ही रेगुलेट होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बाहरी एजेंसियां या संस्थाएं वकीलों की पेशेवर स्थिति के बारे में कोई नकारात्मक बात या राय दर्ज नहीं कर सकतीं, क्योंकि यह काम सिर्फ बार काउंसिल का है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक किसी वकील का नाम 'कॉशन लिस्ट' में डालकर उसे ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते।
हालांकि, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने लगातार बदलते कानूनी पेशे में वकीलों के लिए अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने जजों के लिए बनी 'नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी' की तर्ज पर वकीलों के लिए भी 'नेशनल लीगल एकेडमी' बनाने का सुझाव दिया। बेंच ने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से की जाने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई से सिस्टम में लोगों का भरोसा मजबूत होना चाहिए।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दिया निर्देश
बेंच ने कहा कि इसलिए, हमने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह निर्देश देना सही समझा है कि वह अपनी अनुशासनात्मक शक्तियों की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता का परफॉर्मेंस ऑडिट करे और जरूरी सुधारात्मक उपाय अपनाए। सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकील मनिंदर सिंह को 'एमिकस क्यूरी' (अदालत की सहायता करने वाला वकील) नियुक्त किया था।
बेंच ने सिंह की दलील मान ली, जिसमें कहा गया था कि किसी वकील के खिलाफ पेशेवर कदाचार (प्रोफेशनल मिसकंडक्ट) का कोई भी आरोप संबंधित बार काउंसिल के कानूनी अधिकार क्षेत्र में आता है।
बाहरी एजेंसी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संपर्क करना चाहिए
पेशेवर कदाचार के आरोपी वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में बाहरी एजेंसी की भागीदारी को रोकते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील की याचिका स्वीकार कर ली। इस वकील ने गलत राय देने के आरोप में केनरा बैंक द्वारा अपना नाम 'कॉशन लिस्ट' (सावधानी सूची) में डालने के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि अगर वकील की तरफ से पेशेवर लापरवाही हुई थी, तो बैंक को BCI से संपर्क करना चाहिए था।
लेखक के बारे मेंसंजीव कुमारसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)
संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।
विशेषज्ञता
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शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें
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