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चिराग पासवान ने स्वीकारी बिहार में शराबबंदी कानून की विफलता!

चिराग पासवान ने शराबबंदी कानून मौजूदा स्वरूप में अपने उद्देश्य को हासिल करने में विफल होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा किए जाने की भी जरूरत है।

14 अगस्त 2026 को 06:56 pm बजे
चिराग पासवान ने स्वीकारी बिहार में शराबबंदी कानून की विफलता!

सौजन्य से:- Navbharat Times

Chirag Paswan: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। उधर, इस मसले पर जहां जेडीयू लगातार कानून का बचाव कर रही है। वहीं दूसरी ओर जीतन राम मांझी के साथ कई नेता शराबबंदी कानून को विफल बता रहे हैं। इस श्रेणी में एक और नाम शामिल हो गया है। मोदी के हनुमान यानी चिराग पासवान ने इस कानून को विफल बताया है।

पटना: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (Ramvilas) के प्रमुख चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून मौजूदा स्वरूप में अपने उद्देश्य को हासिल करने में विफल रहा है और इसकी समीक्षा किए जाने की जरूरत है। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान चिराग ने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बावजूद राज्य में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है।

चिराग पासवान का ईमानदार बयान

उन्होंने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद भी नकली शराब समेत शराब की बिक्री, खरीद और निर्माण की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं। नीति का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है और कानून को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी समीक्षा किए जाने की जरूरत है। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2016 में शराबबंदी लागू किए जाने का समर्थन किया था, जबकि उस समय वह विपक्ष में थी।

चिराग पासवान का शराबबंदी पर बयान

उन्होंने कहा कि अब शराब के सेवन के दुष्परिणामों के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। लोजपा (रामविलास) बिहार और केंद्र दोनों में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सहयोगी दल है। चिराग की इस टिप्पणी से कुछ दिन पहले हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने राज्य में शराबबंदी कानून के कमजोर क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया था और बिहार में गुजरात की तर्ज पर शराबबंदी लागू करने की मांग की थी।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने दिया था बयान

हालांकि, राज्य के मंत्री दिलीप जायसवाल ने हाल में बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए कहा था कि “शराब माफिया” और कुछ “शराब प्रेमी” कानून के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

जायसवाल ने कहा था कि बिहार में शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग का अभियान चला रहे हैं। शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी राज्य में शराबबंदी हटाए जाने को लेकर काफी बेताब हैं। उन्होंने शराबबंदी के बाद राज्य के बारे में गलत धारणा बनाने के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा था कि बिहार के लोग शराबबंदी जारी रखने के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं और इससे समाज को काफी लाभ हुआ है।

लेखक के बारे मेंआशुतोष कुमार पांडेयआशुतोष कुमार पांडेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिसिंपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। वे सितंबर- 2022 में टाइम्स ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। फिलवक्त आशुतोष NBT बिहार- झारखंड डिजिटल में डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इवनिंग शिफ्ट इंचार्ज भी हैं। क्षेत्रीय खबरों की प्लानिंग, सटीक संपादन, खबरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के अलावा फील्ड के साथियों से समन्वय स्थापित करने का काम करते हैं। आशुतोष राजनीति, क्राइम, ऑफ बीट स्टोरी, मानवीय संवेदना से जुड़ी खबरों और रेट्रो स्टोरी पर मजबूत पकड़ रखते हैं। 22 वर्षों के अपने पत्रकारीय करियर में 14वीं लोकसभा 2014 से लेकर 17वीं लोकसभा 2019, 13वीं बिहार विधानसभा 2005 से लेकर 18वीं बिहार विधानसभा चुनाव 2025 तक को डेस्क के साथ ग्राउंड पर जाकर कवर किया। इन 22 वर्षों के कार्यकाल में आशुतोष ने कई सियासी अनसुनी कहानियों को कुरेदा। सियासी किस्सों को चुटीले अंदाज में पेश किया। डिजिटल में 'अतीत के पन्नों से' एक सीरीज चलाई। कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद यादव, जयप्रकाश नारायण सहित बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों की अनसुनी कहानी लिखी। रेड लाइट एरिया पर विशेष रिपोर्ट का प्रकाशन।

आशुतोष ने इन 22 वर्षों में 12 वर्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग को दिए। उनकी भारत- नेपाल सीमा पर ट्रेन से होने वाली तस्करी की एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग को ईटीवी ग्रुप के चेयरमैन रामोजी राव ने सराहा और प्रशस्ति पत्र से नवाजा। आशुतोष ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया के तीनो फॉर्म में काम किया है। नेटवर्क 18 में बुलेटिन प्रोड्यूसर के तौर पर कार्य करते हुए आधे- आधे घंटे के कई चर्चित कार्यक्रम बनाए। जिसमें 'चलो चलें अमरनाथ' आज भी लोग पसंद करते हैं। आशुतोष ने लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों का एकांतिक प्रोफाइल इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए बनाया। जिसे नेटवर्क में काफी सराहा गया। आशुतोष खबरों के पीछे की कहानी को पकड़ने में माहिर हैं। उन्होंने छोटी से छोटी खबर को उसे न्यूज वैल्यू तक पहुंचाया। वे भारतीय राजनीति के मझे हुए खिलाड़ियों की कहानियों को किताबों से खोजकर निकालने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने लालू प्रसाद यादव, कर्पूरी ठाकुर सहित कई नेताओं की जीवनी से अनसुनी कहानी खोजी और उसे रेट्रो स्टोरी का रूप दिया।

अनुभव-

डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रानिक पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय। 2001 में इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी दैनिक जनसत्ता के कोलकाता संस्करण में असाइमेंट बेस्ड फीचर राइटर से शुरुआत। बाद के दिनों में हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और आदर्शन समाचार पत्रिका में स्वतंत्र लेखन। 2003 में ईटीवी नेटवर्क में संवाददाता के तौर पर योगदान। 2009 में मौर्य टीवी में कार्य। उसके बाद हिंद्स्तान दैनिक मुजफ्फरपुर संस्करण में लोकल पेज इंचार्ज, फोकस टीवी, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली और प्रभात खबर डिजिटल, नेटवर्क 18 में काम करने का सौभाग्य मिल चुका है। बांग्ला थियेटर 'अल्काप' के आठ प्रोडक्शन में कार्य करने का अनुभव।

अवार्ड और पुरस्कार

2005 से 2009 के बीच 12 बेस्ट स्टोरी ऑफ द डे का पुरस्कार

मौर्य टीवी पटना में ऑफ बीट स्टोरी इंचार्ज के तौर पर सम्मान

LIB बिहार चैप्टर की ओर से प्रेरणास्रोत सम्मान

2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की ओर से 'स्टोरी ऑफ द मंथ' का पुरस्कार

साक्षात्कार-

आशुतोष ने अपने पत्रकारिता करियर में अब तक प्रमोद महाजन, अमर सिंह, जया प्रदा, राजनाथ सिंह, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, मालिनी अवस्थी, कुनिका सदानंद, रवि किशन, मनोज तिवारी मृदुल और भरत शर्मा के अलावा गीतकार गुलजार, अभिनेता पीयूष मिश्रा, सौरभ शुक्ला, सतीश कौशिक सहित वरिष्ठ पत्रकार और पेड न्यूज के खिलाफ अभियान चलाने वाले पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर प्रभाष जोशी का इंटरव्यू कर चुके हैं।... और पढ़ें

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