होमफैसलेक्या बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर का हक है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से समझिए पूरी बात
फैसले

क्या बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर का हक है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से समझिए पूरी बात

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 2005 के बाद से भारतीय सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों ने हिंदू परिवारों में पैतृक संपत्ति में बेटियों के अधिकारों को मजबूत किया है। यहां सुप्रीम कोर्ट के कुछ प्रमुख फैसलों के बारे में पढ़ें कि किन परिस्थितियों में बेटियां पैतृक संपत्ति में दावा कर सकती हैं।

12 जुलाई 2026 को 06:13 am बजे
क्या बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर का हक है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से समझिए पूरी बात

सौजन्य से:- Navbharat Times

हजारों करोड़ की 'सिंधिया विरासत' और तीन पीढ़ियों की 'कानूनी जंग' पर समझौते के संकेत, जानिए क्या है लीगल फैक्टर

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम , 2005 ने क्या बदला?

इस मामले में जो भारत का कानून है, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956, उसमें प्रारंभिक रूप से पैतृक संपत्ति में सह-अधिकार का दर्जा केवल बेटों को ही मिला था। लेकिन साल 2005 में संसद ने महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए बेटियों को भी जन्म से सह-अधिकारिणी घोषित किया। इसका अर्थ है कि बेटी का अधिकार बेटे के समान माना जाएगा। वह संपत्ति में हिस्सा मांग सकती है और विभाजन की मांग भी कर सकती है। यदि परिवार में पैतृक संपत्ति का बंटवारा होता है तो बेटी का हिस्सा बराबर रहेगा। इसमें ध्यान देने वाली बड़ी बात यह है कि विवाह होने के बाद भी उसके अधिकार समाप्त नहीं होते।सुप्रीम कोर्ट के कुछ प्रसिद्ध फैसले, जिनसे बेटियों के हक को मिली ताकत

- प्रकाश बनाम फूलवती (Prakash vs. Phulavati, 2016)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि बेटियों के लिए पैतृक संपत्ति में समान हिस्सेदारी का नियम (2005 का संशोधन) लागू होगा। और यह भी बताया कि इस का लाभ लेने के लिए कानून लागू होने की तिथि (2005) पर बेटी का जीवित होना आवश्यक है।

- विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा (Vineeta Sharma vs. Rakesh Sharma, 2020)

यह बेटियों के संपत्ति अधिकारों से जुड़ा सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेटी जन्म से ही पिता की संपत्ति में बेटे के समान सह-अधिकारिणी (Coparcener) होती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 सितंबर 2005 को हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम लागू होने से पहले यदि पिता की मृत्यु हो चुकी हो, तब भी बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर ही हिस्सा मिलेगा।

- अरुणलाला बनाम उर्मिला लखविंदर सिंह (2022)

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि यदि किसी हिंदू व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत बनाए (Intestate) हो जाती है, तो उसकी खुद की कमाई या बंटवारे में मिली संपत्ति पर उसकी बेटियों का अधिकार किसी भी अन्य रिश्तेदार (जैसे भाई या भतीजे) से पहले होगा।

- अरुण कुमार सेन बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2024)

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना कि शादीशुदा होने मात्र से ही कोई बेटी अपने माता-पिता के परिवार से बाहर नहीं हो जाती। यदि माता-पिता की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है और विवाहित बेटी उन पर पूरी तरह से आश्रित थी, तो वह अनुकंपा नियुक्ति पाने की भी पूर्ण हकदार है।

किन परिस्थितियों में बेटी संपत्ति में दावा कर सकती है?

यदि संपत्ति पैतृक है और उस पर संयुक्त परिवार का अधिकार है, तो बेटी अपने हिस्से का दावा कर सकती है। यदि पिता की मृत्यु बिना वसीयत के होती है तो बेटी कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में बराबर हिस्से की हकदार होती है। विवाहित बेटी भी अपने अधिकारों से वंचित नहीं होती। यदि परिवार में केवल बेटियां हैं, तब भी वे संपत्ति की वैध उत्तराधिकारी होंगी। वैसे प्रत्येक मामले में संपत्ति की प्रकृति और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण आवश्यक होता है। कानूनी सलाह लेकर दावा करना विवादों से बचने का बेहतर तरीका माना जाता है।क्या आपकी प्रॉपर्टी में किसी Co-Owner को पूरी संपत्ति बेचने का अधिकार है? जानिए कानून क्या कहता है

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
न्घे आन प्रांत में लघु एवं मध्यम आकार के उद्यमों के लिए क्रांति
फैसले

न्घे आन प्रांत में लघु एवं मध्यम आकार के उद्यमों के लिए क्रांति

उपभोक्ता अदालत ने दिया डंडा, हॉलिडे कंपनी को ₹1.50 लाख लौटाने का आदेश
फैसले

उपभोक्ता अदालत ने दिया डंडा, हॉलिडे कंपनी को ₹1.50 लाख लौटाने का आदेश

विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजी मजबूत नहीं: सहायक कोच
फैसले

विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजी मजबूत नहीं: सहायक कोच

बिहार के भोजपुर जिले में विशेष लोक अदालत की तैयारी तेज
फैसले

बिहार के भोजपुर जिले में विशेष लोक अदालत की तैयारी तेज

उत्तर प्रदेश में संस्कृत शिक्षा की संकट की गहराई, नितिगत पंगुपन और नौकरशाही की फाइलों में उलझे नियम
फैसले

उत्तर प्रदेश में संस्कृत शिक्षा की संकट की गहराई, नितिगत पंगुपन और नौकरशाही की फाइलों में उलझे नियम

पौड़ी में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत का आयोजन
फैसले

पौड़ी में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत का आयोजन

किरायेदारी हस्तांतरण बिना सहमति के बेदखली को आकर्षित करता है, मर्ज किए गए बैंक को बेदखल करने का आदेश
फैसले

किरायेदारी हस्तांतरण बिना सहमति के बेदखली को आकर्षित करता है, मर्ज किए गए बैंक को बेदखल करने का आदेश

शार्दुल अमरचंद मंगलदास ने वेदांता के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सफलता प्राप्त की
फैसले

शार्दुल अमरचंद मंगलदास ने वेदांता के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सफलता प्राप्त की

ताज़ा ख़बरें