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पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था की जगह बिजनेस में व्यस्त, हाईकोर्ट ने डीजीपी को कार्रवाई का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी को पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया, जो कानून व्यवस्था की जगह बिजनेस में व्यस्त हैं। कोर्ट ने थानों में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर हैरानी जताई और कार्रवाई का आदेश दिया।

31 जुलाई 2026 को 07:15 am बजे
पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था की जगह बिजनेस में व्यस्त, हाईकोर्ट ने डीजीपी को कार्रवाई का निर्देश दिया

सौजन्य से:- livehindustan.com

पुलिस वाले कानून-व्यवस्था देखने की जगह बिजनेस कर रहे, हाईकोर्ट हैरान, डीजीपी को ऐक्शन का निर्देश

यूपी में बलिया के एक कांस्टेबल के खिलाफ आए मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट इस बात से हैरान रह गया कि पुलिस वाले कानून व्यवस्था संभालने की जगह बिजनेस करने में लगे हैं। डीजीपी को पूरे थाने पर ऐक्शन का हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी को बलिया के पुलिस कांस्टेबल के ट्रांसपोर्ट बिज़नेस की जांच करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने इस बार पर हैरानी जताई कि थानेदार और जिले के एसपी दोनों ने कांस्टेबल को बचाने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि थाने कॉमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं, पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बजाय लगातार कॉमर्शियल गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। इसी के साथ न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने प्रदेश के डीजीपी और उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह को बलिया के रसड़ा थाने के सभी पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि 10 दिन के भीतर की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल करें।

यह आदेश कोर्ट ने हरेंद्र यादव के ट्रक को एआरटीओ बलिया द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान किया। ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी, जो याची और रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार के बीच मालिकाना हक के विवाद से संबंधित है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कांस्टेबल से बात की, जिसने बताया कि उसने अपने जीपीएफ अकाउंट से पैसे निकाले और भाई के नाम पर याची के साथ बिज़नेस शुरू किया। एक ट्रक खरीदा। उसे याची चलाता था। कोर्ट ने पाया कि एआरटीओ ने मालिकाना हक के विवाद के संबंध में दरोगा शिवमूर्ति तिवारी की रिपोर्ट के आधार पर ही वाहन को ब्लैकलिस्ट किया। बलिया के पुलिस अधीक्षक ने अपने हलफनामे में कहीं भी यह नहीं बताया कि थाने में तैनात रहते हुए ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने के लिए कांस्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।

थानेदार और एसपी ने कांस्टेबल को बचाया

हालात पर हैरानी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि यह न्यायालय हैरान है कि थाने कॉमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बजाय बिज़नेस गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रखी जा सकती क्योंकि थाने बिज़नेस की जगह बन गए हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि रसड़ा थाने के इंचार्ज और बलिया के पुलिस अधीक्षक ने कांस्टेबल के पक्ष में एआरटीओ बलिया को रिपोर्ट सौंपकर उसे बचाया था। एआरटीओ ने उस गाड़ी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसके ट्रांसफर पर रोक लगाई थी।

इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि संबंधित संबंधित थाना गतिविधियों में शामिल लगता है, जैसा कि विभिन्न अधिकारियों के हलफनामे और उसमें कही गई बातों से साफ था। इसके अनुसार, कोर्ट ने डीजीपी को रसड़ा थाने में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच करने और वहां तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया।

लेखक के बारे में

Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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