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सुप्रीम कोर्ट में सरकार का दावा: प्रधानमंत्री लोकतंत्र के खिलाफ नहीं जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार ने अदालत में कहा कि प्रधानमंत्री लोकतंत्र के खिलाफ नहीं जाएंगे, ऐसा सोचना गलत होगा।

30 जुलाई 2026 को 11:33 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का दावा: प्रधानमंत्री लोकतंत्र के खिलाफ नहीं जाएंगे

सौजन्य से:- दैनिक भास्कर

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- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई | पीएम मोदी का बयान

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सरकार की दलील:सुप्रीम कोर्ट से कहा- पीएम लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे, यह सोचना गलत

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मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत अब यह तय करेगी कि नियुक्ति प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए या नहीं।

वहीं, इस कानून का बचाव करते हुए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दलीली दी- यह मान लेना गलत होगा कि चयन समिति में संख्या बल होने के कारण प्रधानमंत्री और मंत्री ‘बुरी मंशा’ से काम करेंगे या लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे।

केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ से कहा कि अगर प्रधानमंत्री के फैसले को भरोसे लायक नहीं माना जाएगा, तो क्या कैबिनेट चुनते समय भी उन्हें किसी पूर्व जज या बाहरी व्यक्ति से सलाह लेने की शर्त रखी जाएगी?

यहां प्रधानमंत्री पर भरोसा करने का सवाल नहीं: कोर्ट

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि अदालत प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं करती, ऐसा सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा- हम प्रधानमंत्री पर भरोसा क्यों नहीं करेंगे? निश्चित रूप से करेंगे।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री पर भरोसा जताया था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को मंत्री नहीं बनाया जाएगा।

जस्टिस दत्ता ने कहा कि असली मुद्दा यह है कि चुनाव आयुक्त स्वतंत्र व्यक्ति होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या चयन समिति में ऐसे लोग नहीं होने चाहिए, जिससे निष्पक्षता दिखाई भी दे।

हम यह नहीं कह रहे कि इस समिति ने निष्पक्षता हासिल नहीं की, लेकिन अब स्थिति 2:1 की है। प्रधानमंत्री की तरफ दो और विपक्ष की तरफ एक।

चयन प्रक्रिया में CJI को बाहर रखने पर है विवाद

यह कानून दिसंबर 2023 में संसद से पारित हुआ था और 29 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ है, क्योंकि इसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर रखा गया है।

नए कानून में चयन समिति में कौन-कौन हैं?

2023 के कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं।

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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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