सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया झूठे बयान का सुपुर्दार होने से मतलब नहीं है सजा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य तौर पर झूठा बयान देना अपराध नहीं माना जायेगा। इसकी जांच होगी कि क्या पूरी तरह से गलत दावे किए गए थे, अगर हाँ तो इसमें गंभीरता से अपराध के साथ सजा होगी और अगर नही तो केवल लापरवाही और प्रयास की दरकार होगी, कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए

सौजन्य से:- SCC Online
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: हर गलत बयान गलत नहीं होता; झूठी गवाही कानून के दुरुपयोग से बचाता है
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक गलत बयान स्वचालित रूप से आपराधिक मुकदमा चलाने वाला गलत बयान नहीं माना जा सकता है। महत्व पर जोर देते हुए
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक गलत बयान स्वचालित रूप से आपराधिक मुकदमा चलाने वाला गलत बयान नहीं माना जा सकता है। इरादे के महत्व पर जोर देते हुए, न्यायालय ने कहा कि झूठी गवाही से संबंधित कार्यवाही केवल वहीं लागू की जानी चाहिए जहां जानबूझकर झूठ बोलने के स्पष्ट सबूत हों और जहां न्याय के हित में अभियोजन आवश्यक हो।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट में सरकार का जवाब, प्रधानमंत्री पर भरोसा करना गलत नहीं

गर्भावस्था सरकारी नौकरी पाने को नहीं मानी जा सकती है बाधा, हाई कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट में सरकार का दावा: प्रधानमंत्री लोकतंत्र के खिलाफ नहीं जाएंगे

12 सितंबर को होंगे अदालतों में मामलों के जल्द समाधान

सुप्रीम कोर्ट का सवाल: निष्पक्षता का क्या हुआ?

गर्भावस्था का कारण नहीं है सार्वजनिक रोजगार से वंचित होने का, अदालत ने दिया आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओपन एआई के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा को खारिज कर दिया

एमएसीटी ने 15 साल पहले की सड़क दुर्घटना में पीड़ित को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया
ताज़ा ख़बरें
- भगवंत मान को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 2020 के प्रदर्शन मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर उठे सवाल
- सुप्रीम कोर्ट нे जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल पर स्पष्टीकरण मांगा
- अदालत की गाढ़ी नाराजगी: थाना प्रभारी को जमानत प्रकरण में लापरवाही के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल के कानून अभ्यास नियम के विरोध में न्यायिक याचिकाओं का फैसला सुरक्षित रखा
- पुलिस को अनुमति है असाधारण स्थितियों में पैलेट गन चलाना
- वायु सेना के जवान अपनी मर्जी से नौकरी नहीं छोड़ सकते: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- सुप्रीम कोर्ट पर दोनों गुटों के बीच मुकाबला करेगा, विपक्षी दल भी कानून की वैधता पर सवाल उठाएंगे
- सरकारी दबाव में केस चलाने की मंज़ूरी देने की आलोचना में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

