देवेंद्र फडणवीस ने एक कानून से किया शिवसेना-एनसीपी के मंत्रियों को कंट्रोल, मांगते ही तत्काल पेश करनी होगी फाइल, जानिए क्या हैं नियम
देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र सरकार में ऐसी ताकत मिल गई है, जिससे वह किसी भी विभाग की फाइल और नियम कभी भी तलब कर सकते हैं। वह ठोस लिखित टिप्पणी के साथ मंत्रियों के फैसले को जनहित में बदल भी सकते हैं। माना जा रहा है कि नए…

सौजन्य से:- Navbharat Times
देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र सरकार में ऐसी ताकत मिल गई है, जिससे वह किसी भी विभाग की फाइल और नियम कभी भी तलब कर सकते हैं। वह ठोस लिखित टिप्पणी के साथ मंत्रियों के फैसले को जनहित में बदल भी सकते हैं। माना जा रहा है कि नए कानून से फडणवीस सुपर सीएम बन गए हैं।
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने कामकाज के लिए नए नियम के लागू होते ही सीएम देवेंद्र फडणवीस पावरफुल हो गए हैं। माना जा रहा है कि गठबंधन सरकार चला रहे देवेंद्र फडणवीस को एनसीपी और शिवसेना के मंत्रियों को कंट्रोल करने का अधिकार हासिल हो गया है। यानी विभागों में मंत्रियों का फैसला आखिरी नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, अब सीएम की मंत्रियों के फैसलों की समीक्षा करने, उनमें बदलाव करने या उन्हें पलटने की ताकत मिल गई है। हालांकि फैसला पलटने के लिए उन्हें लिखित में कारण बताना होगा। इसके अलावा वह समीक्षा के लिए विभागों से डायरेक्ट फाइल तलब कर सकते हैं।
ठोस कारण देने पर ही बदलेगा मंत्री का फैसला
महायुति सरकार ने आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र सरकार के कामकाज के नियम 2026 को लागू कर दिया है। नए नियमों के तहत सीएम देवेंद्र फडणवीस को जनहित में किसी भी कैबिनेट मंत्री के फैसले को बदलने या पलटने का स्पष्ट कानूनी अधिकार मिल गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मनमाने ढंग से फैसलों को पलटने से रोकने के लिए कानून में यह प्रावधान किया गया है कि सीएम को भी फैसले में बदलाव के लिए ठोस कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा। कैबिनेट में शामिल मंत्री अपने-अपने विभागों का कामकाज करेंगे, लेकिन अब सीएम किसी भी विभाग से आधिकारिक दस्तावेज, कागज या फाइल मांग सकते हैं। सीएम के मांगने पर मंत्री और सचिवों को तत्काल फाइल पेश करना होगा।
क्या था सरकार चलाने का पुराना नियम
सरकार की पुरानी व्यवस्था के तहत पहले सीएम को किसी मंत्री के फैसलों की समीक्षा करने या पलटने का अधिकार नहीं था। 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी एक फैसले में सरकारी कामकाज में इस कमी का जिक्र किया था। पुरानी सिस्टम में मंत्रियों को अपने फैसलों पर पूरी स्वायत्तता हासिल थी। उनके विभाग पर सीएम तभी समीक्षा कर सकते थे, जब मंत्री खुद उस मुद्दे को कैबिनेट में लाए। अब ने कानून से देवेंद्र फडणवीस को फैसले लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने और पॉलिसी से जुड़े गतिरोध को रोकने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वह खुद को मजबूत चीफ मिनिस्टर के तौर पर पेश कर सकेंगे। हालांकि माना जा रहा है कि अगर सीएम का हस्तक्षेप विभागों में बढ़ा तो शिवसेना और एनसीपी नाराज हो सकती है। एकनाथ शिंदे पहले भी ऐसे मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।
लेखक के बारे मेंविश्वनाथ सुमनविश्वनाथ सुमन नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं । वह नॉर्थ ईस्ट, गुजरात, दक्षिण भारत, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा जैसे उत्तर भारतीय राज्यों की टीम का नेतृत्व करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने उनका 21 साल का अनुभव है। विश्वनाथ सुमन ने 2023 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। अभी वह देश के राज्यों में हो रहे राजनीतिक हलचल और सामाजिक परिवर्तन, क्राइम की घटनाओं पर बारीक नजर रखते हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों का कवरेज किया है। देश के राजनीतिक घटनाक्रम पर सबसे पहले खबर देना और उसका विश्लेषण करना विश्वनाथ सुमन की प्राथमिकता रहती है। सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर @Vishwasuman की पहचान के साथ एक्टिव हैं।
विशेषज्ञता- पॉलिटिकल अफेयर्स खासकर राज्यों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और उसके होने वाले संभावित परिवर्तन के साथ असर पर टिप्पणी करना। इसके अलावा क्राइम की खबरों की तहकीकात और विश्लेषण।
पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 21 साल से कार्यरत
भोपाल के दैनिक भास्कर और राज एक्सप्रेस जैसे संस्थानों में शुरुआती ज्ञान लेने के बाद कुछ दिनों तक कई संस्थाओं के लिए फ्रीलांसिंग की। मध्यप्रदेश के झाबुआ में आदिवासियों की समस्याओं के साथ उनकी सक्सेस स्टोरी भी लिखी। उज्जैन महाकुंभ को भी कवर किया। विश्वनाथ सुमन ने साल 2005 में मेरठ में अमर उजाला अखबार से बतौर रिपोर्टर/सब एडिटर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की थी। साल 2008 से करीब 10 साल तक नवभारत टाइम्स प्रिंट में विभिन्न डेस्क पर रहे, साथ ही संपादकीय पृष्ठ पर राजनीतिक और सामयिक विषयों पर लिखते रहे। फिर उन्होंने करीब पांच साल तक डिजिटल वेबसाइट ईटीवी भारत में बतौर उत्तर प्रदेश के टीम लीड के तौर पर काम किया। राजनीतिक विषयों पर लेखन जारी रहा। विश्वनाथ सुमन ने बिहार के प्रतिष्ठित मगध यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन करने के बाद पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने साल 2003 से 2005 के बीच माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के भोपाल कैंपस से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
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