सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की अपील पर गोवा को जवाब‑दाखिली का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व तेहलक़ा एडिटर‑इन‑चीफ तरुण तेजपाल द्वारा दायर याचिका पर गोवा राज्य को जवाब‑दाखिल करने का नोटिस जारी किया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल की ओर से सुनवाई के बाद कोर्ट ने बताया कि तेजपाल ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुसार आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने अगस्त 2026 में उनके 2013 के यौन उत्पीड़न के मामले में 10‑वर्ष की कठोर सजा को निलंबित कर दिया है।

सौजन्य से:- amarujala.com
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: तरुण तेजपाल की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय सख्त, गोवा सरकार को जारी किया नोटिस
Fri, 25 Sep 2026 01:08 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:08 PM IST
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तरुण तेजपाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का गोवा सरकार को नोटिस
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व तेहलका एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल द्वारा दायर याचिका पर गोवा सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उन्हें 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया गया था और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल की बात सुनने के बाद गोवा राज्य से जवाब मांगा, जिन्होंने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुसार आत्मसमर्पण कर दिया था। सिबल ने सुनवाई के लिए जल्द तारीख की मांग करते हुए कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया है।
मामला 2013 में गोवा के एक होटल की लिफ्ट में महिला सहकर्मी के उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। मई 2021 में निचली अदालत ने तेजपाल को बरी किया था, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में पलट दिया।
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पेपर लीक आरोपियों की संपत्ति जब्ती की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में 6 हफ्ते बाद सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामलों में आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र और राज्यों से जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। इसमें आरोपियों और उनके परिवार की संपत्ति का आकलन कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान का भी जिक्र किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामलों में आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र और राज्यों से जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। इसमें आरोपियों और उनके परिवार की संपत्ति का आकलन कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान का भी जिक्र किया गया है।
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