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अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने चाकू से घायल करने के मामले में निचली अदालत का निर्णय कायम किया

अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने अस्मितुल्ला और जाहिद की फौजदारी अपील खारिज करते हुए 14 सितंबर 2023 के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और दोनों को देहरादून जेल भेजने का आदेश दिया। आरोपी, सहारनपुर के खिड़का भटवाड़ा निवासी, ने 2010 में खुशनुदा खान पर चाकू से हमला कर उसे घायल किया था। अदालत ने घायल की चिकित्सकीय रिपोर्ट और गवाहियों पर भरोसा करते हुए उनके दोषसिद्धि को कायम रखा।

25 सितंबर 2026 को 01:05 pm बजे
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने चाकू से घायल करने के मामले में निचली अदालत का निर्णय कायम किया

सौजन्य से:- Hindustan

चाकू से हमला करने के मामले में निचली अदालत की सजा बरकरार

अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने चाकू से हमला कर चोट पहुंचाने के मामले में अस्मितुल्ला और जाहिद की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत के 14 सितंबर 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों को देहरादून जिला कारागार भेजने का आदेश दिया। मामला उत्तराखंड राज्य बनाम अस्मितुल्ला से संबंधित है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह की अदालत ने चाकू से हमला कर चोट पहुंचाने के मामले में अस्मितुल्ला और जाहिद की फौजदारी अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के 14 सितंबर 2023 के दोषसिद्धि निर्णय को बरकरार रखते हुए दोनों आरोपियों को सजा भुगतने के लिए देहरादून जिला कारागार भेजने के आदेश दिए। मामला फौजदारी वाद उत्तराखंड राज्य बनाम अस्मितुल्ला आदि से संबंधित है। दोनों आरोपी गांव खिड़का भटवाड़ा, थाना बेहट, जिला सहारनपुर निवासी हैं। निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ उन्होंने अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विकासनगर में अपील दायर की थी।अभियोजन के अनुसार चार मार्च 2010 को खुशनुदा खान अपनी भाभी फरमीना और बहन फरीदा के साथ रसूलपुर जा रही थी।

लक्ष्मणपुर चौक के पास सीएसडी कैंटीन से आगे बाइक सवार दोनों आरोपी पहुंचे और उनके साथ गाली-गलौज करते हुए दबाव बनाने लगे। आरोप है कि अस्मितुल्ला ने चाकू से खुशनुदा के पेट, हाथ और कंधे पर वार कर उसे घायल कर दिया। अदालत ने घायल के बयान, मौके पर पहुंचे गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना। चिकित्सकीय रिपोर्ट में खुशनुदा के बाएं कंधे, पेट और दाहिनी बांह पर धारदार वस्तु से लगी चोटों का उल्लेख था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष के बयानों की पुष्टि चिकित्सकीय साक्ष्य से होती है। बचाव पक्ष ने कथित चाकू बरामद नहीं होने का तर्क दिया। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच पूर्व रंजिश के तथ्य का भी उल्लेख किया, लेकिन कहा कि इससे अभियोजन के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। साक्ष्यों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का आधार नहीं पाया और निचली अदालत के निर्णय में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

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