सुप्रीम कोर्ट ने सांसद‑विधायकों के आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे को मंजूरी दी
सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में दायर जनहित याचिका को त्वरित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की स्वीकृति दी, जिसमें सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित 4,000 से अधिक आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे की माँग की गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने तत्काल निर्देशों की आवश्यकता पर बल दिया, और पीठ ने याचिका को सूची में रखा। लोकसभा के 251 तथा राज्यसभा के 75 सदस्य अपने खिलाफ दर्ज मामलों को स्वीकार कर चुके हैं।

सौजन्य से:- jagran.com
नेताओं के मुकदमों की होगी डेली हियरिंग? सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों के मामलों पर सुनवाई के लिए भरी हामी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2016 में दायर जनहित याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। ...और पढ़ें
HighLights
- लोकसभा और राज्यसभा के 75 सदस्य अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए है
- सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामलों के शीघ्र निपटारे की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2016 में दायर जनहित याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
याचिका में देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने मामले में तत्काल निर्देश जारी करने की जरूरत बताई। हंसारिया इस मामले में न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) के तौर पर कोर्ट की सहायता कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।
18 अगस्त को पीठ की सदस्य जस्टिस वी. मोहना ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने बताया था कि वह पहले इस मामले में वरिष्ठ वकील के रूप में पेश हो चुकी हैं।
हंसारिया की रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा के 543 सदस्यों में 251 और राज्यसभा के 233 सदस्यों में 75 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। उनके हलफनामे में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामलों का भी उल्लेख है।
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