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दिल्ली हाई कोर्ट ने DU से पीजी में रहने 50,000 छात्रों की सुरक्षा की स्पष्ट योजना मांगी

सत्य निकेतन में पीजी इमारत के गिरने से सात छात्रों की मौत के बाद, कोर्ट ने दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के सर्वे में 2,453 पीजी इमारतों में लगभग 50,529 छात्रों के निवास को उजागर किया। उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा कि बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी में रहने के कारण उनकी सुरक्षित आवास व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी, और स्पष्ट उत्तर की मांग की।

26 सितंबर 2026 को 02:05 am बजे
दिल्ली हाई कोर्ट ने DU से पीजी में रहने 50,000 छात्रों की सुरक्षा की स्पष्ट योजना मांगी

सौजन्य से:- Navbharat Times

सत्य निकेतन में PG इमारत हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली यूनिवर्सिटी को सख्त फटकार लगाते हुए छात्र सुरक्षा पर जवाब मांगा है।

नई दिल्लीः सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के सवालों ने राजधानी में PG हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर सामने रख दी है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब दिल्ली में हजारों स्टूडेंट्स PG में रह रहे हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन तय करेगा।

हाई कोर्ट ने डीयू के जवाब पर उठाए सवाल

MCD के सर्वे में 2,453 PG इमारतों में करीब 50,529 लोग रहते मिले। इनमें केवल 730 प्रॉपर्टी का मंजूर बिल्डिंग प्लान था। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी के जवाब पर भी सवाल उठाए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने DU से पूछा

कोर्ट ने कहा कि DU में करीब 1.3 लाख रेगुलर स्टूडेंट्स हैं, लेकिन हॉस्टल की सुविधा सिर्फ 5,698 छात्रों के लिए है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र बाहर PG या निजी आवासों में रहते हैं। कोर्ट ने DU से पूछा कि छात्रों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के लिए उसकी क्या योजना है?

DU के वकील ने दिया भरोसा

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने DU के स्टेटस हलफनामे को 'अस्पष्ट' बताया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी देखा कि यूनिवर्सिटी ने याचिकाकर्ता की मांगों को ही अपने जवाब में दोहरा दिया था। इस पर DU के वकील ने एक हफ्ते के भीतर नया और स्पष्ट हलफनामा दाखिल करने का भरोसा दिया।

MCD के सर्वे की तस्वीर

कोर्ट के सामने MCD के सर्वे की तस्वीर भी रखी गई। 12 जोन में किए गए सर्वे में चार इमारतें ऐसी मिलीं, जिन्हें खतरनाक माना गया। 30 इमारतों में बड़ी मरम्मत और 91 में छोटी मरम्मत की जरूरत मिली। 8 लोड-बेयरिंग और 77 फ्रेम वाली बहुमंजिला इमारतों को भी निगरानी के लिए चिह्नित किया गया। कोर्ट की समीक्षा में एक और अहम बात सामने आई। जिन PG संपत्तियों का इंस्पेक्शन किया गया, उनमें किसी के पास मास्टर प्लान के तहत PG गतिविधि चलाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में यह सवाल भी उठा कि इन जगहों पर इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को रहने की अनुमति कैसे मिल रही

लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें

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