वेश्यालय में गए ग्राहक पर ITP कानून के तहत नहीं चला सकते केस, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
Allahabad High Court Decision: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आईटीपी कानून के तहत केस चलाए जाने को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने ग्राहक बनकर वैश्यालय गए लोगों को इस दायरे में न आने की बात कही। प्रयागराज: उत्तर प्रदेश क…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Allahabad High Court Decision: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आईटीपी कानून के तहत केस चलाए जाने को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने ग्राहक बनकर वैश्यालय गए लोगों को इस दायरे में न आने की बात कही।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वैश्यालय में ग्राहक बनकर जाने वाले व्यक्ति पर केस दर्ज किए जाने के मामले में बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ग्राहक के तौर पर वेश्यालय जाने वाले व्यक्ति पर अनैतिक व्यापार निवारण (ITP) अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। कोर्ट ने इसका कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि निजी संतुष्टि के लिए किसी को पैसे देना इस कानून के तहत वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से किसी व्यक्ति की खरीद-फरोख्त के समान नहीं माना जा सकता है।
हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के क्रम में कहा कि ये धाराएं वेश्यालय चलाने या उसका प्रबंधन करने से संबंधित हैं। साथ ही, इन धाराओं के तहत किसी स्थान को वेश्यालय के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने, किसी अन्य व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई पर गुजारा करने और किसी व्यक्ति को यौन शोषण के लिए उपलब्ध कराने, उकसाने या ले जाने से जुड़ी हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम चौधरी ने 11 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा कि अगर कोई व्यक्ति ग्राहक के तौर पर वेश्यालय जाता है तो अधिकतम यह कहा जा सकता है कि वह अपनी कामेच्छा की संतुष्टि के लिए किसी वेश्या की सेवा ले रहा है। इस प्रकार के मामले में यह नहीं कहा जा सकता है कि अधिनियम में परिभाषित वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से उसने यह सेवा ली, जिसमें व्यावसायिक शोषण आवश्यक तत्व है।
हाई कोर्ट ने कहा कि इसलिए, जो ग्राहक अपनी संतुष्टि के लिए पैसे देता है, उस पर इस अधिनियम की धारा 3, 4, 5 या 7 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने नितिन नामक व्यक्ति की याचिका स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दाखिल आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
गाजियाबाद का है मामला
दरअसल, मामला गाजियाबाद है। 31 दिसंबर 2023 को गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके के एक मकान पर पुलिस ने छापा मारा था। इस दौरान पुलिस ने 16 लोगों को पकड़ा था। इसमें नितिन भी शामिल था। याचिकाकर्ता पर अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि किसी ग्राहक के खिलाफ इन धाराओं के तहत आरोप कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं, क्योंकि ये प्रावधान वेश्यालय संचालन, उसका प्रबंधन करने या वेश्यावृत्ति से जुड़े अन्य कृत्यों से संबंधित हैं।
कोर्ट ने कहा कि केवल अपनी कामेच्छा की संतुष्टि के लिए किसी महिला को धन देने मात्र से किसी ग्राहक को वेश्यालय संचालन, उसका प्रबंधन करने या उसके संचालन में सहयोग करने वाला व्यक्ति नहीं माना जा सकता।
आरोपी को माना ग्राहक
हाई कोर्ट ने नितिन की याचिका पर सुनवाई के क्रम में कहा कि वह केवल एक ग्राहक था। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता महज एक ग्राहक था। वह पैसे देकर अपनी कामेच्छा की संतुष्टि के लिए वहां आया था, न कि वेश्यावृत्ति कराने के उद्देश्य से। इसलिए उक्त धाराएं उस पर लागू नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग होगा।
लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।
विशेषज्ञता- राजनीतिक खबरों का विश्लेषण, क्राइम की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट, प्रशासनिक हलचल को लेकर इनसाइड स्टोरी, सरकार के फैसलों का आम लोगों पर असर का विश्लेषण।
पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 22 साल से कार्यरत
राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा:
राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें
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