होमअपराधसुप्रीम कोर्ट ने कहा, गर्भवती IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर पूरी तरह रोक गलत
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गर्भवती IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर पूरी तरह रोक गलत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गर्भवती IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर पूरी तरह रोक गलत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे फैसले व्यक्तिगत मेडिकल फिटनेस पर आधारित होने चाहिए, ताकि महिलाओं के करियर में बिना वजह रुकावट न आए।

8 जुलाई 2026 को 01:57 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गर्भवती IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर पूरी तरह रोक गलत

सौजन्य से:- ABP News

Supreme Court On Pregnant IPS Officer : गर्भवती IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग पर पूरी तरह रोक को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गलत, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

गर्भवती और नई मां बनी IPS अधिकारी को ट्रेनिंग से रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा. कोर्ट ने पूछा- क्या मातृत्व महिलाओं के करियर में रुकावट बन सकता है?

भारतीय पुलिस सेवा की प्रोबेशनरी महिला अधिकारियों को गर्भ के दौरान और उसके बाद ट्रेनिंग लेने से रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं. इस नियम को लैंगिक समानता के विरुद्ध बताते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. मामला एक ऐसी IPS अधिकारी का है जिन्हें बच्चे को जन्म देने के चलते ट्रेनिंग से रोक दिया गया है. गुरुवार, 9 जुलाई को याचिका पर सुनवाई होगी.

मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की IPS अधिकारी उर्वशी सेंगर ने नवंबर 2023 में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में अपनी 'फेज-1' की ट्रेनिंग शुरू की थी. अप्रैल 2025 में जब उनकी 'फेज-2' की ट्रेनिंग चल रही थी, तब उन्होंने अपने गर्भवती होने की जानकारी अकादमी को दी. अकादमी ने गृह मंत्रालय के 23 अगस्त 1993 के एक ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला देते हुए उन्हें ट्रेनिंग छोड़ने को कह दिया. यह मेमोरेंडम गर्भवती महिलाओं को ट्रेनिंग से पूरी तरह बाहर रखने की बात कहता है.

यह भी पढ़ें : Firozabad News: डॉक्टर भी रह गए हैरान! कोबरा को डिब्बे में बंद कर ट्रॉमा सेंटर पहुंचा युवक

बच्चे के जन्म के बाद भी रोक

उर्वशी सेंगर ने सितंबर 2025 में बच्चे को जन्म दिया. इसके करीब 9 महीने बाद, जब जून 2026 में 'फेज-2' की अगली ट्रेनिंग तय हुई, तब उन्होंने उसमें शामिल होने की अनुमति मांगी. लेकिन पुलिस अकादमी ने 1993 के उसी नियम का हवाला देकर उनकी अर्जी खारिज कर दी. उस नियम में यह भी लिखा है कि प्रसव के एक साल बाद ही महिला ट्रेनिंग में हिस्सा ले सकती है.

सुप्रीम कोर्ट का सवाल

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने इस "पूर्ण प्रतिबंध" की वैधता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हर महिला की शारीरिक क्षमता अलग होती है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के इस दौर में किसी महिला अधिकारी को सिर्फ मातृत्व के आधार पर एकतरफा नियमों से नहीं बांधा जा सकता. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसे फैसले पुरानी रूढ़ियों के बजाय व्यक्तिगत मेडिकल फिटनेस पर आधारित होने चाहिए, ताकि महिलाओं के करियर में बिना वजह रुकावट न आए.

'महिलाओं का बेवजह नुकसान न हो'

कोर्ट ने केंद्र सरकार के मौजूदा नियमों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि कोई गर्भवती IPS प्रोबेशनर शारीरिक रूप से फिट पाई जाती है, तो उसे अपनी ट्रेनिंग जारी रखने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती? कोर्ट ने कहा कि नियम भले ही गर्भवती महिला अधिकारियों को राहत देने के उद्देश्य से बना हो, लेकिन उसे बिना सोचे लागू करना नुकसानदेह हो सकता है. हर मामले की अलग समीक्षा कर निर्णय लिया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें : Pune Building Collapsed: पुणे के पिंपरी चिंचवड़ में गिरी बिल्डिंग, 14-15 लोग दबे, रेस्क्यू जारी

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
चंदा चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट में : 13 जुलाई को हो सकती है सुनवाई
अपराध

चंदा चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट में : 13 जुलाई को हो सकती है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी देशों के सीबीएसई छात्रों की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी देशों के सीबीएसई छात्रों की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास को अलीपुर अदालत में दर्ज हत्या के प्रयास के आरोप में सुरक्षा मिलती है
अपराध

बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास को अलीपुर अदालत में दर्ज हत्या के प्रयास के आरोप में सुरक्षा मिलती है

सुप्रीम कोर्ट जल्द फिर से सुनवाई कर सकता है राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की
अपराध

सुप्रीम कोर्ट जल्द फिर से सुनवाई कर सकता है राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की

सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगियों को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिली
अपराध

सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगियों को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिली

बाल विवाह पर प्रतिबंध सभी धर्मों पर लागू होता है: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
अपराध

बाल विवाह पर प्रतिबंध सभी धर्मों पर लागू होता है: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

ओडिशा हाई कोर्ट का क्रांतिकारी फैसला: साथ ही हुए अपराधों की सजा एक साथ मिलेगी
अपराध

ओडिशा हाई कोर्ट का क्रांतिकारी फैसला: साथ ही हुए अपराधों की सजा एक साथ मिलेगी

कॉपीराइट उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर धौलपुर में ग्लब्स फैक्ट्री की दो मशीनें जब्त
अपराध

कॉपीराइट उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर धौलपुर में ग्लब्स फैक्ट्री की दो मशीनें जब्त

ताज़ा ख़बरें