होमअपराधसुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताई, यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर रिपोर्ट अपलोड करने का निर्देश
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताई, यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर रिपोर्ट अपलोड करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यौन अपराध के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी समिति की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट की वेबसाइटों पर अपलोड किया जाए।

15 जुलाई 2026 को 06:13 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताई, यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर रिपोर्ट अपलोड करने का निर्देश

सौजन्य से:- Jagran

'छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं', पटना HC के आदेश पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर पटना हाईकोर्ट के एक आदेश पर नाराजगी जताई, जिसमें 'सलवार उतारना और छाती दबाना' रेप की कोशिश नही ...और पढ़ें

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताई।

- यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर रिपोर्ट अपलोड करने का निर्देश।

- सभी अदालतों और पुलिस को हैंडबुक का पालन करने का आदेश।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यौन अपराध के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी समिति की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट की वेबसाइटों पर अपलोड किया जाए।

यह रिपोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च, 2025 के उस आदेश से उपजे स्वतः संज्ञान वाले मामले में तैयार की गई थी, जिसमें कहा गया था कि किसी लड़की के पजामे का नाड़ा खींचना और उसके स्तनों को पकड़ना रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा।

वकील ने कोर्ट को क्या बताया?

वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसा समय-समय पर होता रहा है और इसमें 9 जुलाई को पटना हाई कोर्ट का एक आदेश भी शामिल है, जिसमें कहा गया था कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस वी. मोहना ने पूछा कि क्या पटना हाईकोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया गया था, जिसमें जजों को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाने का निर्देश दिया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पटना हाई कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि जजों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे कुछ रिसर्च करें। उन्होंने कहा, "स्टाफ कुछ नहीं कर रहा है।"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि सभी अदालतें हैंडबुक में दी गई बातों का पालन करें। राज्य सभी पुलिस स्टेशनों को निर्देश जारी करें कि वे एफआईआर दर्ज करते समय और चार्जशीट दाखिल करते समय हैंडबुक का पालन करें। हम तर्कपूर्ण फैसला भी अपलोड करेंगे।"

खबरें और भी

पटना हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना रेप की कोशिश साबित करने के लिए काफी नहीं है। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति महिला की सलवार उतारता है और उसकी छाती दबाता है तो ये हरकतें महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध मानी जाएंगी न कि रेप की कोशिश। पटना हाई कोर्ट ने रेप की कोशिश के मामले में एक व्यक्ति की सजा को रद करते हुए यह टिप्पणी की।

क्या था मामला?

यह मामला 2008 की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया था कि वह अपने पिता के साथ अमरपुर के एक फोटोग्राफी स्टूडियो गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, फोटो लेने के बाद स्टूडियो के मालिक ने उसके पिता से कहा कि वे बाहर इंतजार करें क्योंकि उसे कंप्यूटर पर फोटो देखनी थी। इसके बाद उसने स्टूडियो का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और महिला के साथ यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की।

महिला की चीख-पुकार सुनकर उसके पिता दरवाजे की ओर दौड़े, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया। एफआईआर दर्ज होने और जांच के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की बलात्कार की कोशिश और गलत तरीके से बंधक बनाने की धाराओं के तहत दोषी ठहराया। उसने हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

सबूतों पर दोबारा विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि रेप की कोशिश के आरोप को साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कोई मेडिकल सबूत नहीं था। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि ट्रायल के दौरान जांच अधिकारी से पूछताछ नहीं की गई थी और अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से पीड़िता और उसके माता-पिता के बयानों पर टिका था।

मामले के तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने माना कि प्रॉसिक्यूशन रेप की कोशिश का अपराध साबित करने में नाकाम रहा है। अदालत ने माना कि अगर अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह से मान भी लिया जाए तो भी लगाए गए आरोपों से आईपीसी की धारा 354 के तहत किसी महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध साफ तौर पर साबित होता है।

हाई कोर्ट ने कहा, "मुझे लगता है कि अपील करने वाले ने पीड़िता को स्टूडियो के अंदर बंद करके, दरवाजा बंद करके, उसकी सलवार उतारने की कोशिश करके और उसकी छाती दबाकर उसके साथ छेड़छाड़ करके आपराधिक बल का इस्तेमाल किया। ये हरकतें साफ तौर पर साबित करती हैं कि महिला पर आपराधिक बल का इस्तेमाल इस इरादे से या कम से कम इस जानकारी के साथ किया गया था कि ऐसी हरकतों से उसकी मर्यादा को ठेस पहुंच सकती है।"

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
बलात्कार के प्रयास के लिए नहीं माना जाएगा सलवार उतारने का प्रयास: पटना उच्च न्यायालय का फैसला
अपराध

बलात्कार के प्रयास के लिए नहीं माना जाएगा सलवार उतारने का प्रयास: पटना उच्च न्यायालय का फैसला

सलवार खोलना..': सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अदालतें होंगी माननीय
अपराध

सलवार खोलना..': सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अदालतें होंगी माननीय

महाकुंभ से सensation बनी मोनालिसा पर क्यों मंडरा रहा कानूनी संकट?
अपराध

महाकुंभ से सensation बनी मोनालिसा पर क्यों मंडरा रहा कानूनी संकट?

दिल्ली दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या में फैसला, परिवार ने क्या कहा?
अपराध

दिल्ली दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या में फैसला, परिवार ने क्या कहा?

सोनम वांगचुक की जान जोखिम में: दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर
अपराध

सोनम वांगचुक की जान जोखिम में: दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले लॉ स्टूडेंट को पुलिस ने गिरफ्तार किया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले लॉ स्टूडेंट को पुलिस ने गिरफ्तार किया

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले दो कानून छात्र गिरफ्तार
अपराध

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले दो कानून छात्र गिरफ्तार

न्यायपालिका में संवेदनशीलता का नया दिशा-निर्देश: यौन अपराधों के मामलों में अदालतों को संवेदनशीलता बरतने का निर्देश
अपराध

न्यायपालिका में संवेदनशीलता का नया दिशा-निर्देश: यौन अपराधों के मामलों में अदालतों को संवेदनशीलता बरतने का निर्देश

ताज़ा ख़बरें