दिल्ली दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या में फैसला, परिवार ने क्या कहा?
दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच अभियुक्तों को IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया है. अंकित शर्मा का परिवार अब गाज़ियाबाद में रहता है और उन्हें उम्मीद है कि अभियुक्तों को फांसी की सजा दी जाएगी.

सौजन्य से:- BBC
आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या में फ़ैसला आने के बाद दिल्ली छोड़ चुके परिवार ने क्या बताया?
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- ........से, नई दिल्ली
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच अभियुक्तों को इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी क़रार दिया.
अदालत ने इस मामले में छह नामजद अभियुक्तों को बरी भी कर दिया. ये हत्या फ़रवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फैले दंगों के दौरान हुई थी.
ये दिल्ली दंगों के दौरान दर्ज़ सबसे हाई प्रोफ़ाइल मामलों में से एक है. ये रिपोर्ट लिखे जाने तक अदालत का फ़ैसला सार्वजनिक रूप से प्रकाशित नहीं हुआ है. हालांकि मुक़दमे के दौरान ताहिर हुसैन ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था. उनका परिवार भी उन्हें बेगुनाह बताता रहा है.
अदालत के विस्तृत फ़ैसले के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने इन दलीलों को किन आधारों पर अस्वीकार किया.
ताहिर हुसैन का परिवार उन्हें बेग़ुनाह बताता रहा है. दंगों के बाद गिरफ़्तारी से पहले दिए एक बयान में ताहिर हुसैन ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा था, "मैं दंगा नहीं फैला रहा था, मैं दंगा रोक रहा था."
समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों के मुताबिक़, अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या और कई अन्य अपराधों का दोषी माना लेकिन उन्हें आपराधिक साज़िश के आरोप से बरी कर दिया.
अदालत के फ़ैसले के बाद बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए अंकित शर्मा के बड़े भाई अंकुर ने कहा, "हम अदालत के फ़ैसले से ख़ुश हैं और उम्मीद करते हैं कि अभियुक्तों को फांसी की सज़ा दी जाएगी. इस फ़ैसले से लोगों का न्याय में भरोसा मज़बूत होगा."
अंकित शर्मा का परिवार अब ग़ाज़ियाबाद में रहता है. उनके भाई ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "भाई की मौत के बाद हमें घर छोड़ना पड़ा, अब हम किराए के मकान में रहते हैं. हम एक सामान्य जीवन जीना चाहते हैं."
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी थे जो दिल्ली दंगों के दौरान हुई हिंसा में मारे गए थे. 22 साल की उम्र में नौकरी शुरू करने वाले अंकित अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे.
उनके बड़े भाई अंकुर ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "वह पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी संभाल रहा था. उसके इलाक़े में सबसे दोस्ताना संबंध थे."
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक पत्र लिखकर अंकित शर्मा की मौत पर दुख ज़ाहिर किया था और कहा था, "वह एक बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ कर्मी थे जिन्होंने कठिन चुनौतियों का सामना किया."
25 फ़रवरी को अंकित शर्मा के साथ क्या हुआ था?
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एपिसोड
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23 फ़रवरी की शाम को दिल्ली में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहा आंदोलन कथित टकराव के बाद हिंसक हो गया था.
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वज़ीराबाद और करावल नगर समेत कई इलाक़ों में हिंसक घटनाएं हुईं थीं.
24 फ़रवरी को तनाव और इलाक़ों में फैल गया और कई अन्य इलाक़ों में हमलों, आगजनी और टकराव की हिंसक घटनाएं हुईं और तनाव ने सांप्रदायिक दंगों का रूप ले लिया.
25 फ़रवरी 2020 को दयालपुर थाने में दर्ज़ जनरल डायरी (जीडी) एंट्री संख्या 163A के मुताबिक़, शाम क़रीब चार बजे तत्कालीन आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन के घर की छत से पत्थरबाज़ी और गोलीबारी हुई जिसमें दो लोग घायल हुए.
उसी शाम क़रीब पांच बजे अंकित शर्मा अपने घर से निकले.
उनके पिता ने पुलिस को दी शिक़ायत में बताया था कि अंकित शर्मा काम से लौटने के बाद बाहर सामान ख़रीदने निकले थे.
वहीं, बाद में बीबीसी को दिए बयान में उन्होंने कहा था कि अंकित दफ़्तर से लौटने के बाद बाहर का माहौल देखने के लिए घर से निकले थे.
अदालत में पेश दस्तावेज़ों और पुलिस की चार्ज शीट के मुताबिक़, शाम पांच बजे के कुछ देर बाद उग्र भीड़ ने चांद बाग़ पुलिया के पास अंकित शर्मा को पकड़ लिया.
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, अभियोजन ने तीन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान पेश किए, जिन्होंने ताहिर हुसैन को भीड़ को उकसाते हुए देखने का दावा किया था.
भीड़ के इस हमले में अंकित शर्मा की मौत हो गई थी और बाद में उनकी लाश नाले से मिली थी. अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक़, उनके शरीर पर 51 घाव थे.
अंकित शर्मा जब घर नहीं पहुंचे तो उनके पिता रविंद्र कुमार शर्मा ने दयालपुर थाने में अगले दिन यानी 26 फ़रवरी, 2020 को ग़ुमशुदगी दर्ज़ करवाई थी.
बाद में, इसी दिन चांद बाग़ पुलिया के पास खजूरी ख़ास नाले से अंकित शर्मा की लाश मिली थी. उनके शरीर पर अंडरवियर के अलावा कपड़े नहीं थे.
शव मिलने के बाद हत्या का मुक़दमा दर्ज़ किया गया और 28 फ़रवरी को जांच को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) को सौंप दिया गया. एफ़एसएल की टीम ने उसी दिन ताहिर हुसैन के घर और अन्य ठिकानों की जांच की.
1-2 मार्च के बीच इसी इलाक़े में हुई अन्य हत्याओं के संबंध में अलग-अलग एफ़आईआर दर्ज की गईं और 16 मार्च को ताहिर हुसैन को गिरफ़्तार कर लिया गया.
जून 2020 में पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाख़िल की और अगस्त 2020 में अदालत ने इस चार्जशीट का संज्ञान लिया.
30 जुलाई, 2021 को अदालत ने आरोप तय करने के लिए विस्तृत आदेश पारित किया था.
मार्च 2023 में अदालत ने ताहिर हुसैन समेत उनके कई सहयोगियों के ख़िलाफ़ हत्या, दंगा-फ़साद फैलाने, आपराधिक साज़िश रचने और सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोप तय किए.
जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था.
सोमवार, 13 जुलाई 2026, को सत्र न्यायालय ने ताहिर हुसैन समेत कुल पांच लोगों को दोषी क़रार दिया. हालांकि सज़ा का एलान अभी नहीं किया गया है.
कौन हैं ताहिर हुसैन?
ताहिर हुसैन, अंकित शर्मा की हत्या के मुक़दमे में मुख्य अभियुक्त हैं. इस घटना के समय वह आम आदमी पार्टी के पार्षद थे. हालांकि, अंकित शर्मा की हत्या के मामले में नाम दर्ज़ होने के बाद आम आदमी पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता ख़त्म कर दी थी और पार्टी से निकाल दिया था.
अदालत में ताहिर हुसैन की तरफ़ से कई बार ज़मानत याचिका दायर की गई. उन्हें दंगों से संबंधित कुल 12 एफ़आईआर में नामजद किया गया था.
नौ मामलों में उन्हें ज़मानत भी मिली. लेकिन अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उन्हें नियमित ज़मानत नहीं मिली.
हालांकि, पिछले साल जनवरी में ताहिर हुसैन जब एआईएमआईएम की टिकट पर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बने थे तब सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें चुनाव प्रचार करने के लिए ज़मानत दी थी. ज़मानत अवधि पूरी होने के बाद वो फिर से जेल लौट गए थे.
ताहिर हुसैन मार्च 2020 के बाद से ही न्यायिक हिरासत में हैं और सिर्फ़ चुनाव प्रचार के लिए ही जेल से बाहर आए थे.
अंकित शर्मा की हत्या के मुक़दमे में ताहिर हुसैन के साथ नामज़द कई लोगों को ज़मानत मिल गई थी. लेकिन सितंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन को नियमित ज़मानत देने से इनकार कर दिया था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने नियमित ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथमदृष्टया अभियोजन के आरोपों का समर्थन करती है और इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि हिंसा अचानक हुई थी.
अदालत ने इसी मामले में अन्य अभियुक्तों को ज़मानत दे दी थी लेकिन ताहिर हुसैन की ज़मानत ख़ारिज करते हुए अदालत ने कहा था कि दंगा फैलाने में उनकी भूमिका अहम थी.
मुक़दमे के दौरान ताहिर हुसैन ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया. उनके वकीलों का कहना था कि उन्हें राजनीतिक रूप से फंसाया गया है और अभियोजन के गवाहों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर उन्होंने सवाल उठाए.
अदालत के विस्तृत फ़ैसले के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने इन दलीलों को किन आधारों पर अस्वीकार किया.
ताहिर हुसैन का परिवार उन्हें बेग़ुनाह बताता रहा है. दंगों के बाद गिरफ़्तारी से पहले दिए एक बयान में ताहिर हुसैन ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा था, "मैं दंगा नहीं फैला रहा था, मैं दंगा रोक रहा था."
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