सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी फुटपाथों पर अतिक्रमण का जारी, राहगीरों की जान जोखिम में
दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 4 दिनों बाद भी फुटपाथों पर अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। इससे राहगीरों की जान जोखिम में पड़ रही है। फुटपाथ पर अवैध रूप से पार्किंग, रेहड़ियाँ और दुकानदारों का सामान लगा हुआ है।

सौजन्य से:- Jagran
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी दिल्ली के फुटपाथों पर अतिक्रमण जारी, जोखिम में राहगीरों की जान
सुप्रीम कोर्ट द्वारा फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक घोषित करने के बावजूद, दिल्ली में चार दिन बाद भी अतिक्रमण हटाने का कोई बड़ा अभियान शुरू नहीं हुआ ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ पर चलने का अधिकार मौलिक घोषित किया।
- दिल्ली में आदेश के चार दिन बाद भी अतिक्रमण जारी।
- अतिक्रमण के कारण सैकड़ों राहगीर सड़क हादसों में जान गंवाते हैं।
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून को फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था। कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि यह अधिकार मोटर वाहनों के विशेषाधिकार से ऊपर है।
इसके बाद यह उम्मीद जगी थी कि संबंधित एजेंसियां अब इसके क्रियान्वयन में लग जाएंगी, लेकिन चार दिन बाद भी दिल्ली में कहीं भी फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए कोई बड़ा अभियान नहीं शुरू किया गया है।
दुकान का सामान फुटपाथ पर लगा रहे
अब भी विभिन्न इलाकों में फुटपाथ पर अवैध रूप से वाहनों की पार्किंग हो रही है, रेहड़ियां लगी हैं और दुकानदार अब भी अपनी दुकान का सामान फुटपाथ पर लगा रहे हैं। फुटपाथ पर अतिक्रमण का खामियाजा राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। उनको सड़क पर जाना पड़ता है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। दिल्ली में हर साल 600 से अधिक राहगीरों की सड़क हादसों में मौत हो जाती है।
वर्ष 2022 में फुटपाथ पर अतिक्रमण होने से सड़क पर चलने वाले 629 राहगीरों की सड़क हादसों में मौत हो गई थी। इसी तरह 2023 में 622, 2024 में 624 और 2025 में 649 राहगीरों की सड़क हादसों में मौत हो गई। इसके बावजूद एनडीएमसी, एमसीडी, पुलिस-प्रशासन अब तक कोई सख्ती नहीं दिखाई जा रही है।
निगमबोध घाट के सामने रिंग रोड के एक तरफ फुटपाथ पर दुकानदारों ने न केवल अपनी दुकानों का सामान फैला रखा है, बल्कि तिरपाल टांग कर रहने के लिए आशियाने भी बना लिए हैं। फुटपाथ पूरी तरह ब्लाक होने के कारण राहगीरों को मजबूरी में तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच मुख्य मार्ग या सर्विस लेन पर चलना पड़ रहा है। यही चिंताजनक स्थिति पुरानी दिल्ली और उसके आसपास के प्रमुख ऐतिहासिक बाजारों में भी है।
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चांदनी चौक: फुटपाथ पर खड़ी होती हैं बाइक
चांदनी चौक स्थित टाउन हाल के समीप गांधी पार्क की दीवार के पास साइकिल और फुटपाथ पर मोटरसाइकिल खड़ी की जाती हैं। इससे राहगीरों को आवाजाही करने के लिए जगह नहीं बजती। इसी तरह श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग के फुटपाथ को अब पूरी तरह से रिक्शा स्टैंड बना दिया गया है।
वनखंडी मंदिर: रेहड़ियों ने राहगीरों को किया बेदखल
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के ठीक सामने का फुटपाथ रेहड़ियों के जाल में इस कदर गुम हो चुका है कि यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती। थोड़ा आगे बढ़ने पर वनखंडी मंदिर से हरदयाल लाइब्रेरी जाने वाले मार्ग पर बने फुटपाथ को वाहनों की अवैध पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है।
नेताजी सुभाष मार्ग: दोनों तरफ सजती हैं दुकानें
लाल किला के ठीक सामने नेताजी सुभाष मार्ग के दोनों ओर फुटपाथ पर दुकानें सजती हैं। इससे राहगीरों को आवाजाही करने के लिए जगह नहीं मिलती है। यह स्थिति महज चंद इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली के लगभग हर छोटे-बड़े बाजार, मुख्य मार्ग और रिहायशी इलाके की यही कहानी बन चुकी है।
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लाजपत राय मार्केट: पैदल चलना दूभर
लाजपत राय मार्केट के सामने गाड़ियों की अवैध पार्किंग ने पैदल यात्रियों का दम निकाल रखा है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की इस अनदेखी के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और दिल्ली की जनता जान हथेली पर रखकर चलने को विवश है।
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