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बंगाल में सबके लिए 'एक समान कानून' की दस्तक, आगामी सप्ताह में पेश हो सकता है यूसीसी बिल

शुभेंदु सरकार आगामी सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करने जा रही है, जो भाजपा के 'संकल्प पत्र' का हिस्सा है। यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू करेगा, जो धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना होगा।

25 जून 2026 को 05:23 pm बजे
बंगाल में सबके लिए 'एक समान कानून' की दस्तक, आगामी सप्ताह में पेश हो सकता है यूसीसी बिल

सौजन्य से:- Jagran

बंगाल में सबके लिए 'एक समान कानून' की दस्तक, आगामी सप्ताह पेश हो सकता है समान नागरिक संहिता बिल

शुभेंदु अधिकारी सरकार आगामी सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करने जा रही है। यह भाजपा के 'संकल्प पत्र' का हिस्सा है। ...और पढ़ें

HighLights

- शुभेंदु सरकार सोमवार को यूसीसी विधेयक पेश करेगी।

- विवाह, तलाक, उत्तराधिकार में समान कानून लागू होंगे।

- भाजपा के 'संकल्प पत्र' का महत्वपूर्ण वादा पूरा होगा।

राज्य ब्यूरो, जागरण। कोलकाता बंगाल की राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। ममता बनर्जी किले को ढहाकर सत्ता में आई मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार अपने सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित वादे को अमलीजामा पहनाने जा रही है। राजनीतिक गलियारों से आ रही पुख्ता खबरों के अनुसार, शुभेंदु सरकार आगामी सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करने वाली है।

भाजपा ने अपने 'संकल्प पत्र' में वादा किया था कि सत्ता में आने के तीन महीने के भीतर राज्य में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा, और अब सरकार उसी 'संकल्प' को सिद्ध करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।

खुद पीएम मोदी ने दी थी गारंटी

चुनाव प्रचार के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुर्शिदाबाद की जनसभा से बंगाल की जनता को गारंटी दी थी कि राज्य में कानून का शासन और समानता स्थापित करने के लिए यूसीसी लाया जाएगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए दावा किया था कि वह बंगाल में यूसीसी को कभी पैर नहीं पसारने देंगी। हालांकि, विधानसभा चुनाव में तृणमूल की करारी शिकस्त और भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने इस कानून का रास्ता साफ कर दिया।

उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब बंगाल

समान नागरिक संहिता लागू होते ही बंगाल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील मामलों में धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू हो जाएगी। गुजरात, उत्तराखंड और असम जैसे भाजपा शासित राज्यों की राह पर चलते हुए अब बंगाल भी कानूनी एकरूपता का नया अध्याय लिखने जा रहा है।

खबरें और भी

केंद्र सरकार का भी यह स्पष्ट रुख रहा है कि एक ही देश में दो तरह की व्यवस्थाएं और कानूनी असमानता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। चालू विधानसभा सत्र में इस बिल के पेश होने की खबरों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है, जिसे शुभेंदु सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। बताते चलें कि गोवा में पहले ही यूसीसी लागू है।

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