इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को मान्यता देते हुए फैसला सुनाया
उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले के दवा कारोबारी आयुष मलिक के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तय किया कि उन्होंने 2014 में स्वयं की इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया और उस पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं था। कोर्ट ने उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी और उन्हें अपनी पसंद के धर्म व जीवन साथी चुनने का संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया।

सौजन्य से:- BBC
आयुष मलिक बोले- मर्ज़ी से अपनाया इस्लाम धर्म, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया अहम फ़ैसला
उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले के दवा कारोबारी आयुष मलिक के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को माना कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म कुबूल किया था.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा करते हुए उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी है.
जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि आयुष मलिक बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने में सक्षम हैं.
अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इस फ़ैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था.
ग़ौरतलब है कि इस साल जून महीने में आयुष के पिता देवराज मलिक की शिकायत के बाद शामली पुलिस ने कथित 'साज़िशन धर्म परिवर्तन' के आरोप में उनकी कथित पत्नी चांदनी क़ुरैशी और ससुर इस्लाम क़ुरैशी को गिरफ़्तार किया था.
इसके बाद जून के आख़िर में आयुष मलिक का ऐसा कथित वीडिया सामने आया था जिसमें आयुष मलिक पूजा करते नज़र आ रहे थे.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा?
आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण से जुड़ी याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई थी जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई.
इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी है.
हाई कोर्ट ने कहा कि आयुष बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने में सक्षम हैं.
अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इस फ़ैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था.
उन्होंने चांदनी क़ुरैशी से शादी करने की इच्छा भी जताई. कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा के अनुसार धर्म चुनने और अपने जीवनसाथी का चुनाव करने का संवैधानिक अधिकार है.
अदालत ने कहा कि आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर रोक जारी रखने का कोई क़ानूनी आधार नहीं है और उन्हें अपनी पसंद की जगह पर तथा अपनी इच्छा से चुने व्यक्ति के साथ रहने, अपनी पसंद का धर्म मानने और वैवाहिक संबंध के बारे में क़ानून के मुताबिक़ फ़ैसला लेने की स्वतंत्रता है.
स्थानीय रिपोर्टर पंकज कुमार से आयुष मालिक के पिता देवराज मलिक ने अदालत के फ़ैसले के बाद फ़ोन पर बात करते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश मान्य है.
ये याचिका दायर किए जाने के समय आयुष मलिक ने फ़ोन पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा था, "मैं अदालत के ज़रिए अपनी धार्मिक स्वतंत्रता हासिल करना चाहता हूं इसलिए अदालत का रुख़ कर रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि मेरी बात सुनी जाएगी."
पूजा करने के वीडियो पर क्या है कहना?
जून महीने में आयुष मलिक का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो पूजा कर रहे हैं.
इसके अलावा वीडियों में वो वापस हिंदू धर्म अपनाने की बात कर रहे थे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि की थी लेकिन शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा था कि उन्हें इस बारे में फ़िलहाल कोई जानकारी नहीं है.
हिंदू धर्म में वापसी के अपने कथित वायरल वीडियो के बारे में आयुष मलिक ने कहा, "भावनात्मक दवाब में मुझसे यह वीडियो बनवाया गया था, मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं, उनकी ज़िंदगी का हवाला देकर मुझे हिंदू धर्म में वापसी का वीडियो जारी करने के लिए मजबूर किया गया था."
वहीं, अदालत के फ़ैसले से पहले बीबीसी से बात करते हुए आयुष मलिक ने कहा था, "मुझे पूरी उम्मीद है कि अदालत मेरी व्यक्तिगत धार्मिक आज़ादी को बरक़रार रखेगी. मैं क़ानून के ज़रिए अपना अधिकार हासिल करना चाहता हूं."
क्या था मामला?
शामली ज़िले के दवा कारोबारी के बेटे आयुष मलिक ने इस्लाम धर्म में परिवर्तन किया था. उन्होंने अपनी कथित पत्नी और ससुर की गिरफ़्तारी के बारे में मीडिया से बात की थी.
शामली पुलिस ने 6 जून को आयुष मलिक उर्फ़ मोहम्मद अली के पिता देवराज मलिक की तरफ़ से दी गई शिकायत के बाद मुक़दमा दर्ज किया था.
इसके बाद आयुष के कथित 'साज़िशन धर्म परिवर्तन' के आरोप में उनकी कथित पत्नी चांदनी क़ुरैशी और ससुर इस्लाम क़ुरैशी को गिरफ़्तार किया गया था.
शामली पुलिस ने इस मामले में आयुष मलिक उर्फ़ मोहम्मद अली की पत्नी चांदनी क़ुरैशी के अलावा 9 नामजद अभियुक्तों और एक अज्ञात व्यक्ति के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया था. इस मुक़दमे में चांदनी के परिवार से जुड़े लोगों के अलावा एक मौलवी को भी अभियुक्त बनाया गया है.
मामले के बारे में जानकारी देते हुए शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से कहा था, "क़रीब तीस साल के आयुष मलिक एक संपन्न परिवार से हैं, उनके पिता देवराज मलिक शामली शहर के बड़े दवा कारोबारी हैं और शामली के दवा व्यवसायिक संघ के अध्यक्ष भी हैं. आयुष उनके चार बच्चों में सबसे छोटा है और अकेला बेटा है."
एसपी के मुताबिक़, "देवराज मलिक ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनके बेटे को संपत्ति हड़पने के मक़सद से साज़िशन चांदनी क़ुरैशी के ज़रिए फंसाया गया और धर्म परिवर्तन कराया गया."
हालांकि इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए आयुष उर्फ़ मोहम्मद अली ने कहा था, "मेरे नाम प्रापर्टी नहीं हैं, मैंने अपने पिता को बोल दिया है कि वो अपनी संपत्ति मेरी बहनों और मेरी मां के नाम कर दें. प्रापर्टी को मुद्दा ना बनाया जाए."
पिता देवराज मलिक का दावा
देवराज मलिक ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था, "मुझे इसी साल फ़रवरी में पता चला कि मेरे बेटे ने धर्म परिवर्तन कर लिया है. हमने कई बार उससे वापस हिंदू धर्म अपनाने की गुज़ारिश की लेकिन वो नहीं माना. एक साज़िश के तहत उसे फंसाया गया और उसका धर्म परिवर्तन करवाया गया."
वहीं धर्म बदलने को लेकर अपने परिवार की प्रतिक्रिया पर आयुष मलिक ने कहा था, "मेरा परिवार नाराज़ है, वो कह रहे हैं कि हिंदू बनकर, हमारा बनकर रह, मैं उनसे कहता हूं कि मैं तुम्हारा ही हूं, उसके लिए हिंदू होना ज़रूरी नहीं, मैं अपनी नई धार्मिक पहचान के साथ रह सकता हूं."
देवराज मलिक ने ये दावा भी किया था कि उनके बेटे और चांदनी क़ुरैशी के निकाह का फ़र्ज़ी निकाहनामा क़रीब चार साल पहले बनवाया गया था.
पुलिस अब निकाहनामे की जांच भी कर रही है. वहीं आयुष मलिक ने मीडिया से कहा था कि निकाह उन्होंने अपनी मर्ज़ी से किया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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