इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में 'शांति भंग' की धाराओं के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में 'शांति भंग' की धाराओं के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने हेबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 317/2026 में 8 दिन तक अवैध हिरासत में रखे गए व्यक्ति को ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति को बिना वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए जेल नहीं भेजा जा सकता। आजतक के अनुसार, अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित दोषी अधिकारी, तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के वेतन से वसूल की जाएगी।
इस फैसले में हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का उल्लेख किया है और पुलिस की कार्रवाई को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
संबंधित ख़बरें

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समय बदल गया है, विवाह पूर्व यौन संबंध नैतिक अधमता नहीं है

जिंदल पॉली फिल्म्स विवाद, भारत का प्रथम श्रेणी एक्शन सूट, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए भेजा

बिना शादी सहमति से संबंध खराब चरित्र का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट बोला- रिश्ता टूटने को धोखा नहीं मान सकते, कांस्टेबल की नियुक्ति को मंजूरी दी


