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महाराष्ट्र में किसानों की शिकायतों का निपटारा होगा 7 दिन में!

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए नया सिस्टम बनाया है। अब खराब बीज, खाद और कीटनाशकों की शिकायतों की जांच 7 दिनों के भीतर पूरी होगी। दोषी कंपनियों और विक्रेताओं के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

18 जुलाई 2026 को 02:13 pm बजे
महाराष्ट्र में किसानों की शिकायतों का निपटारा होगा 7 दिन में!

सौजन्य से:- Gaon Connection

खराब बीज, खाद और कीटनाशकों पर अब 7 दिन में होगा फ़ैसला! किसानों की शिकायतों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाया नया सिस्टम

Gaon Connection | Jul 18, 2026, 18:35 IST

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए तालुका स्तर की शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया है। अब बीज, खाद और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों की जांच सात दिनों के भीतर पूरी होगी। खेतों का निरीक्षण, पंचनामा और लैब परीक्षण अनिवार्य रहेगा। दोषी कंपनियों और विक्रेताओं के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि अधिक शिकायतों वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त समितियां भी बनाई जाएंगी।

किसानों की शिकायतों पर अब नहीं होगी देरी!

खरीफ़ सीज़न के दौरान किसानों को अक्सर खराब गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की वजह से नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार शिकायतों के बावजूद जांच और कार्रवाई में देरी होने से किसानों की परेशानी और बढ़ जाती है। अब महाराष्ट्र सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत किसानों की शिकायतों की जांच तय समय-सीमा में पूरी की जाएगी, ताकि दोषी कंपनियों और विक्रेताओं के ख़िलाफ़ जल्द कार्रवाई हो सके।

राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से तालुका स्तर की शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया गया है। अब बीज, खाद और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत मिलने के सात दिनों के भीतर मौके पर निरीक्षण करना और अंतिम रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को तेज़ और पारदर्शी न्याय मिल सकेगा।

कृषि विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, शिकायत मिलने के एक सप्ताह के भीतर समिति को संबंधित खेत का निरीक्षण करना होगा। जांच के बाद निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से शिकायतों का निपटारा पहले की तुलना में अधिक तेज़ी और पारदर्शिता से होगा। नई समिति की अध्यक्षता तालुका कृषि अधिकारी करेंगे। इसमें कृषि विश्वविद्यालय, कृषि अनुसंधान केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), महाबीज़ और कृषि विभाग के अन्य अधिकारियों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि जांच तकनीकी रूप से निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर हो सके।

नई व्यवस्था के तहत निरीक्षण के समय संबंधित कंपनी और विक्रेता के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी अनिवार्य होगी। किसानों द्वारा प्रस्तुत खरीद रसीदों का सत्यापन किया जाएगा और निर्धारित प्रारूप में पंचनामा तैयार किया जाएगा। इसके बाद संबंधित बीज या कृषि आदान के नमूने मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित होगी और दोषी निर्माता या विक्रेताओं के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई करना आसान होगा।

कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने बताया कि यदि किसी तालुका में शिकायतों की संख्या 100 से अधिक होती है, तो वहां अतिरिक्त शिकायत निवारण समितियों का गठन किया जाएगा। इसके लिए जिला अधीक्षक कृषि अधिकारियों को आवश्यकतानुसार तुरंत नई समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक शिकायतों की स्थिति में भी जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित न हो तथा किसानों को समय पर राहत मिल सके।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कृषि विभाग बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखेगा। हर शिकायत का समयबद्ध निपटारा किया जाएगा और जांच में यदि कोई निर्माता या विक्रेता घटिया गुणवत्ता का कृषि आदान बेचता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से किसानों का भरोसा बढ़ेगा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से तालुका स्तर की शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया गया है। अब बीज, खाद और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत मिलने के सात दिनों के भीतर मौके पर निरीक्षण करना और अंतिम रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को तेज़ और पारदर्शी न्याय मिल सकेगा।

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