सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को नई दिशा: नवोदय विद्यालयों के लिए 3 महीने में जमीन आवंटन का आदेश
अदालत ने तमिलनाडु सरकार से 'आत्मसमर्पण' की अवधारणा छोड़कर केन्द्र के साथ मिलकर प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिये जमीन की पहचान करने को कहा, और 15 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में तीन महीने में जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। न्यायाधीशों ने राज्य‑केंद्र सहयोग, वित्तीय बाधाओं और भाषा नीति से जुड़ी बहसों को भी नोट किया, परन्तु शिक्षा मानकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
नवोदय विद्यालय विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की तमिलनाडु को दो टूक, 3 महीने में जमीन देने का आदेश
तमिलनाडु में क्यों नहीं खुल पा रहे नवोदय विद्यालय? 8 साल पुराने विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला. जानें क्या है पूरा मामला.
By Sumit Saxena
Published : September 17, 2026 at 4:43 PM IST
|Updated : September 17, 2026 at 4:54 PM IST
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया कि वह "आत्मसमर्पण" की धारणा को छोड़े और इसके बजाय केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू करे. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली के शिक्षा मानकों से तमिलनाडु के शिक्षा मानक कमजोर नहीं होंगे.
बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रत्येक जिले में 'जवाहर नवोदय विद्यालय' स्थापित करने के लिए जमीन की पहचान करने से जुड़े 15 दिसंबर, 2025 के अदालती आदेश का पालन करे. इसके साथ ही अदालत ने रेखांकित किया कि राज्य और केंद्र के बीच सहयोग को अलगाव या घुटने टेकने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
सर्वोच्च अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हम कह सकते हैं कि... चेन्नई के लोगों को दिल्ली को खुद से अलग नहीं समझना चाहिए। और यही बात दिल्ली पर भी लागू होती है कि दिल्ली को भी..."
यह मामला जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस ए. जी. मसीह की बेंच के सामने आया. जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता से कहा कि आप अपने राज्य में जो भी अच्छे काम कर रहे हैं, अदालत उससे पूरी तरह वाकिफ है. उन्होंने आगे कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु का शिक्षा स्तर काफी ऊंचा है, और नवोदय विद्यालयों के रूप में कुछ अतिरिक्त मिलने से आपके शिक्षा के स्तर में कोई गिरावट नहीं आएगी.
राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि तमिलनाडु इन स्कूलों की स्थापना के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह नवोदय योजना से जुड़ी भाषा नीति का विरोध कर रहा है. अदालत में यह तर्क दिया गया कि बड़ी कक्षाओं में मुख्य भाषा के रूप में हिंदी सीखने पर जोर दिया जा रहा है, जो एक ऐसे राज्य में चिंता का विषय है, जहां राज्य के कानून के तहत तमिल भाषा पढ़ाना अनिवार्य है.
गुप्ता ने कहा, "मुझे इस पर कोई दलील नहीं देने दीजिए. मेरा मानना नहीं है कि अदालत को इस बहस में पड़ना चाहिए... भाषा एक मौलिक अधिकार है." गुप्ता ने आगे कहा, "यहां न केवल भाषा थोपी जा रही है, बल्कि आपकी अदालत के हर अंतरिम आदेश का अनुचित लाभ भी उठाया जा रहा है..."
राज्य सरकार ने बेंच के सामने वित्तीय चिंताएं भी उठाईं और इस बात की ओर इशारा किया कि केंद्र ने शिक्षा के लिए 5,000 करोड़ रुपये जारी करने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया. तमिलनाडु के वकील ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल अतिरिक्त वित्तीय देनदारियां नहीं उठा सकता, जब केंद्र सरकार कथित तौर पर मौजूदा योजनाओं के तहत ही फंड जारी करने में विफल रही है.
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के. एम. नटराज ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि जहां तक वित्तीय जिम्मेदारी का सवाल है, केंद्र सरकार नवोदय विद्यालयों की पूरी फंडिंग करती है- जिसमें शिक्षकों का वेतन, स्कूल की फीस और निर्माण कार्य शामिल है- सिर्फ जमीन को छोड़कर. नटराज ने जोर देते हुए कहा, "केवल जमीन दी जानी है..."
बेंच ने सुझाव दिया कि डिप्टी कमिश्नर या कलेक्टर्स जमीन की पहचान कर सकते हैं और अंततः, हर किसी को मिलकर काम करना चाहिए. बेंच ने आगे जोड़ा, "कृपया उनकी आशंकाओं को दूर करें... एक ऐसी धारणा हो सकती है कि, ओह! आपने केंद्र सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. वह धारणा नहीं होनी चाहिए. एक राज्य के रूप में बातचीत करें और यहां आत्मसमर्पण का कोई सवाल ही नहीं है."
बेंच ने ध्यान दिया कि राज्य के वकील ने तर्क दिया कि पिछले साल दिसंबर में पारित अंतरिम आदेश का पालन नहीं किया गया है. पहली बात, राज्य में सरकार बदलने के कारण और दूसरी बात, सचिवों के माध्यम से राज्य और केंद्र के बीच हुई बातचीत का राज्य सरकार के संबंध में अब तक कोई ठोस बदलाव या परिणाम नहीं निकला है.
गुप्ता ने कहा कि 15 दिसंबर, 2025 के आदेश को वापस लेने के लिए एक आवेदन दायर किया गया है. बेंच ने कहा, "हम याचिकाकर्ता राज्य को हमारे दिनांक 15.12.2025 के आदेश का पालन करने का निर्देश देते हैं, जहां तक याचिकाकर्ता राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि की पहचान करने का सवाल है. बेशक, उपरोक्त निर्देश विशेष अनुमति याचिका के अधीन है."
बेंच ने राज्य सरकार को उपयुक्त भूमि की पहचान करने के लिए तीन महीने का समय दिया और राज्य और केंद्र दोनों के प्रतिनिधियों से स्कूलों की स्थापना की नीति के संबंध में आगे की चर्चा करने को कहा. बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर तय की है.
साल 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने का फैसला किया था, जिसमें तमिलनाडु सरकार को राज्य भर के जिलों में केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित (सेंट्रली-फंडेड) जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, 8 साल के अंतराल के बाद, 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक सकारात्मक बातचीत शुरू होनी चाहिए और ग्रामीण छात्रों के अवसरों को दबाया नहीं जाना चाहिए.
पीठ ने अपने आदेश में कहा था, "हम इस अदालत द्वारा 11 दिसंबर 2017 को लगाए गए अंतरिम स्थगन के आदेश में संशोधन करते हैं और याचिकाकर्ता-राज्य को यह निर्देश देते हैं कि वह याचिकाकर्ता-राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि की पहचान करे. यह कार्य छह सप्ताह की अवधि के भीतर किया जाएगा और स्थिति रिपोर्ट इस अदालत के समक्ष रखी जाएगी. 6 सप्ताह बाद सूचीबद्ध करें."
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