संविधान पीठ: 29 बड़े मामले लंबे इंतजार के बाद तेजी से निपटेंगे, क्या है इस पर सुप्रीम कोर्ट की योजना?
सुप्रीम कोर्ट में 29 संविधान पीठ के मामले लंबित हैं, जो महत्वपूर्ण कानूनी सवालों पर सुनवाई करते हैं। संविधान पीठ के पहले के प्रमुख ऐतिहासिक मामले 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य', 'के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ', 'इंद्र साहनी बनाम भारत संघ', 'एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ', 'मिनरवा मिल्स बनाम भारत संघ' और 'शायरा बानो बनाम भारत संघ' हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
मोदी सरकार का एक संवैधानिक फैसला और बदल गया इतिहास, जानिए 7 साल में अनुच्छेद 370 और 35A के हटने पर क्या बदला
सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ Constitution Bench आखिर होती क्या है?
- संविधान पीठ सुप्रीम कोर्ट की ऐसी बड़ी पीठ होती है, जो संविधान की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवालों पर सुनवाई करती है।
- संविधान Article 145(3) के जरिए कहता है कि किसी मामले में संविधान की व्याख्या से जुड़ा कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न होने पर कम से कम पांच जजों की पीठ जरूरी है। इसी वजह से पांच, सात या उससे अधिक जजों वाली पीठ को संविधान पीठ के रूप में गठित किया जा सकता है।
- ऐसे मामलों में अदालत के फैसले का असर केवल संबंधित पक्षों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यापक संवैधानिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। मौलिक अधिकार, संघीय संरचना, विधायी शक्तियाँ और संवैधानिक संशोधन जैसे प्रश्न कई बार ऐसी पीठों के सामने आते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के अपने फैसलों में भी Article 145(3) के तहत पांच जजों की न्यूनतम आवश्यकता को स्पष्ट किया गया है। इसीलिए संविधान पीठ मामलों का तेजी से निपटना न्यायिक व्यवस्था के लिए भी खासा महत्व रखता है।
कितने संविधान पीठ के मामले लंबे समय से लंबित हैं?
बार एंड बेंच की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में कुल 29 संविधान पीठ के मामले लंबित हैं, जिनमें कई मामलों को बड़े यानी सात जजों वाली पीठ के सामने सुनवाई की आवश्यकता है। इन मामलों में ऐसे कानूनी प्रश्न शामिल हैं जिनका अंतिम उत्तर छोटी पीठों द्वारा नहीं दिया जा सकता। एक संविधान पीठ के मामले की सुनवाई में कई दिनों या उससे भी अधिक समय लग सकता है। इसके कारण नियमित मामलों की सूची और संविधान पीठ के मामलों के बीच समय का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। CJI का दो घंटे का स्लॉट इसी चुनौती को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।Tribunal Reforms Bill संसद से पास, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्या कनेक्शन? 16 ट्रिब्यूनलों पर रखेगा नजर
संविधान पीठ के पहले के प्रमुख ऐतिहासिक मामले और उनके फैसले क्या थे
- केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) - इसमें कुल 13 न्यायाधीश शामिल थे, जो कि अब तक की सबसे बड़ी पीठ रही है। इसके फैसले में 'संविधान की मूल संरचना' का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया। जिसके जरिए यह तय हुआ कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह उसके मूल ढांचे को नष्ट नहीं कर सकती।
- के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) - इसमें पीठ का आकार कुल 9 न्यायाधीश वाला था। इस संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया कि 'निजता का अधिकार' भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
- इंद्र साहनी बनाम भारत संघ (1992) - यह संविधान पीठ भी कुल 9 न्यायाधीशों को शामिल कर के बनाई गई थी। इसे 'मंडल मामला' भी कहा जाता है। दरअसल, इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27% आरक्षण को वैध ठहराया गया, लेकिन आरक्षण की कुल सीमा 50% से अधिक न हो (क्रीमी लेयर के सिद्धांत के साथ) यह भी तय किया गया।
- एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ (1994) - इस संविधान पीठ वाले मामले में कुल 9 न्यायाधीश शामिल रहे। इस संविधान पीठ के फैसले ने अनुच्छेद 356 यानी राष्ट्रपति शासन की व्यवस्था के तहत राज्य सरकारों की मनमाने ढंग से बर्खास्तगी किए जाने पर कड़ा अंकुश लगाया और धर्मनिरपेक्षता को संविधान का मूल ढांचा माना।
- मिनरवा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) - इस संविधान पीठ का आकार कुल 5 न्यायाधीशो का था। इस पीठ के फैसले के जरिए यह साफ हुआ कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन संविधान के बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा है, और न्यायिक समीक्षा की शक्ति को छीना या वापस नहीं लिया जा सकता।
- शायरा बानो बनाम भारत संघ (2017) - इस संविधान पीठ में कुल 5 न्यायाधीश शामिल रहे। इस का फैसला मुस्लिमों में तीन तलाक से जुड़ा था। इस मामले में संविधान पीठ ने तत्काल तीन तलाक (तलाक ए बिदत) की प्रथा को असंवैधानिक और मनमाना घोषित किया ।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कृषि और पर्यावरण कानून में सुधार पर चर्चा

ट्रंप ने तीसरे कार्यकाल के प्रयासों को कानूनी बाधाओं से जोड़ा, 2028 में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई

जीतने की इच्छा लेकिन कानूनी बाधाएं: ट्रंप ने 2028 में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई

देश के सबसे ज्यादा बदले गए 10 कानून, जिन्होंने भारतीय जिंदगी को बदल दिया

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 19 राज्यों को कैंसर को 'सूचित बीमारी' घोषित करने का निर्देश

राष्ट्रीय सभा ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कानूनों में संशोधन पर चर्चा की

राष्ट्रीय सभा ने मसौदा कानूनों पर चर्चा जारी रखी

न्यायपालिका की विस्तृत सेवा दृष्टांत: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की सेवानिवृत्ति के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय विधानसभा में प्रौद्योगिकी और दूरसंचार संबंधी कानूनों पर चर्चा
- राष्ट्रीय विधानसभा ने दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन कानून में संशोधन पर चर्चा की
- राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के कानून को मंजूरी दे दी
- स्व-घोषणा के साथ कानूनी जिम्मेदारी अनिवार्य
- संसद सदस्यों ने जल और खनिज संसाधन प्रबंधन में सुधार के लिए नए नियम प्रस्तुत किए
- सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी, राष्ट्रपति ने मंजूरी दीं
- सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 38 हुई, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
- कर्नाटक के नए कानून से RSS पर क्या मकसद?

