जीतने की इच्छा लेकिन कानूनी बाधाएं: ट्रंप ने 2028 में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2028 में तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने संवैधानिक सीमाओं के कारण इसे असंभव बताया है। उन्होंने कहा कि कानून बहुत सख्त है और वे चुनाव लड़ना चाहुंगे, लेकिन कानून उन्हें ऐसा करने से रोकता है।

सौजन्य से:- Jagran
'कानून बहुत सख्त, लेकिन मैं तीसरी बार...', आगामी अमेरिकी चुनाव को लेकर ट्रंप ने जताई अजीबोगरीब इच्छा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2028 में तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा जताई, लेकिन संवैधानिक सीमाओं के कारण इसे असंभव बताया। ...और पढ़ें
HighLights
- ट्रंप ने 2028 में तीसरे कार्यकाल की इच्छा व्यक्त की।
- संवैधानिक सीमाओं के कारण चुनाव लड़ने से इनकार किया।
- 22वां संशोधन राष्ट्रपति के दो कार्यकाल सीमित करता है।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए तीसरा कार्यकाल पर लगी संवैधानिक रोक को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि हालांकि वे एक और चुनाव अभियान का स्वागत करेंगे, लेकिन कानूनी सीमाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं।
मैरीलैंड में ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए संभावित उम्मीदवारी से जुड़े सीधे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कानून स्पष्ट रूप से किसी मुख्य कार्यकारी को दो बार से अधिक पद के लिए चुने जाने से रोकता है।
कानून सख्त होने का दिया हवाला
ट्रंप ने कहा कि हर कोई मुझसे यह सवाल पूछता है, और आप जानते हैं कि इस मामले में कानून बहुत सख्त है। मैं चुनाव लड़ना चाहूंगा, लेकिन कानून बहुत सख्त है। ट्रंप ने कहा कि समर्थक अक्सर उनसे दोबारा चुनाव लड़ने का आग्रह करते हैं। हर कोई मुझसे यही पूछता है, यहां तक कि आज रात भी, वे कार्यक्रम में चिल्ला रहे थे, '2028!
ट्रंप के बयान के मायने समझिए
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के इन बयानों से यह साफ होता है कि उनकी टिप्पणियां 2028 के चुनाव अभियान की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हैं, बल्कि मौजूदा कानूनी सीमाओं को स्वीकार करना है।
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यह संवैधानिक प्रतिबंध अमेरिका के संविधान के 22वें संशोधन से आया है, जिसमें कहा गया है, "कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति के पद के लिए दो बार से अधिक नहीं चुना जाएगा। 1947 में कांग्रेस द्वारा पारित और फरवरी 1951 में राज्यों द्वारा मंजूर किए गए इस संशोधन के तहत राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा तय कर दी गई।
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