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देश में वीपीएन का इस्तेमाल रोकने के लिए सरकार ला रही नया कानून

केंद्र सरकार एक और व्यापक कानून बनाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत वीपीएन कंपनियों के लिए भारत में दफ्तर खोलना अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार से संपर्क बनाए रखने के लिए कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति भी करनी होगी।

3 जुलाई 2026 को 03:25 am बजे
देश में वीपीएन का इस्तेमाल रोकने के लिए सरकार ला रही नया कानून

सौजन्य से:- Jansatta

देश में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) यानी वीपीएन सेवाओं को लेकर केंद्र सरकार एक और व्यापक कानून बनाने पर विचार कर रही है। इस कानून के तहत वीपीएन कंपनियों के लिए भारत में दफ्तर खोलना अनिवार्य किया जा सकता है। साथ ही, सरकार से संपर्क बनाए रखने के लिए कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति भी करनी होगी।

जानकारी के लिए बता दें कि 2022 में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (Cert-In) ने एक निर्देश जारी किया था। उस निर्देश के तहत वीपीएन कंपनियों को अपने ग्राहकों का नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस जैसी जानकारियां सुरक्षित रखने के लिए कहा गया था। लेकिन अब केंद्र सरकार को महसूस हो रहा है कि 2022 का वह निर्देश पर्याप्त नहीं था। असल में, लोग वीपीएन का इस्तेमाल करके सरकार द्वारा ब्लॉक की गई वेबसाइटों और ऑनलाइन कंटेंट तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि नए कानून के तहत वीपीएन कंपनियों को भारत में अपना ऑफिस खोलना होगा और शिकायतों के समाधान के लिए कंप्लायंस ऑफिसर भी नियुक्त करने होंगे। अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो भारत में मौजूद उसके कर्मचारियों के खिलाफ जेल जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान किया जा सकता है। वैसे, ऐसे ही कुछ प्रावधान आईटी नियम, 2021 में पहले से मौजूद हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में यह देखा गया है कि यूजर वीपीएन सेवाओं का इस्तेमाल करके सरकार द्वारा ब्लॉक किए गए कंटेंट, अकाउंट और वेबसाइटों तक पहुंच बना रहे हैं। अधिकारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि 2022 में जो निर्देश दिए गए थे, उनका वीपीएन कंपनियों पर कोई खास असर नहीं पड़ा। इसी वजह से अब एक व्यापक कानून की जरूरत महसूस की जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) से जवाब मांगने की कोशिश की, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।

जानकारी के लिए बता दें कि वीपीएन ऐसी सेवा है, जो यूजर का असली आईपी एड्रेस छिपा देती है और इंटरनेट ट्रैफिक को किसी दूसरे देश में मौजूद सर्वर के जरिए भेजती है। इससे ऐसा लगता है कि यूजर भारत में रहकर भी किसी दूसरे देश के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि उसकी असली लोकेशन छिपी रहती है।

समझने वाली बात यह भी है कि अगर भारत सरकार किसी कंटेंट को देश में ब्लॉक करती है, तो वह प्रतिबंध सिर्फ भारत की सीमा के भीतर लागू होता है। लेकिन अगर कोई यूजर अमेरिका जैसे किसी दूसरे देश के वीपीएन सर्वर का इस्तेमाल करता है, तो वह भारत में ब्लॉक किए गए कंटेंट तक भी पहुंच सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने की कार्रवाई काफी तेज हुई है। पिछले साल सरकार ने 24,000 से ज्यादा कंटेंट ब्लॉक करने के आदेश जारी किए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 12,000 से ज्यादा थी।

सरकार को यह कदम उठाने की जरूरत इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि वीपीएन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। पिछले महीने जब केंद्र सरकार ने NEET-UG रीटेस्ट से पहले कुछ समय के लिए टेलीग्राम को ब्लॉक किया था, तब वीपीएन कंपनी प्रोटॉन वीपीएन के जनरल मैनेजर डेविड पीटरसन ने दावा किया था कि भारत में उनकी सेवा के लिए रोजाना होने वाले नए रजिस्ट्रेशन में 120 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बाद भारत में उनकी X पोस्ट और उनका अकाउंट दोनों ब्लॉक कर दिए गए।

वहीं, केंद्र सरकार के इस प्रस्तावित कानून को लेकर वीपीएन प्रोवाइडर ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। प्रोटॉन वीपीएन पहले ही कह चुका है कि कंपनी का ऐसा कोई इरादा नहीं है कि वह इस तरह के नियमों का पालन करेगी। कंपनी का कहना है कि ऐसी स्थिति में भारत से अपने वीपीएन सर्वर हटाने के अलावा उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।

ये भी पढ़ें- गंभीर मामलों में गिरफ्तारी पर मंत्री पद जाएगा

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