तुषार मेहता का नया बयान: हिंदू कानून की जड़ें 'स्मृतियों' में, मनुस्मृति को लेकर कई भ्रांतियां;
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि वर्तमान हिंदू कानून प्राचीन विद्वानों की कानूनी व्याख्याओं और स्मृतियों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू कानून को केवल मनुस्मृति से जोड़कर देखना एक बड़ी गलतफहमी है।

सौजन्य से:- Jagran
हिंदू कानूनों की जड़ें 'स्मृतियों' में, मनुस्मृति को लेकर कई भ्रांतियां; तुषार मेहता का बड़ा बयान
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि वर्तमान हिंदू कानूनों की मूल आधारशिला स्मृतियां हैं, जो प्राचीन विद्वानों द्वारा कानून, नैतिकता और सामाजिक व्यव ...और पढ़ें
HighLights
- सॉलिसिटर जनरल बोले- वर्तमान हिंदू कानून प्राचीन विद्वानों की कानूनी व्याख्याओं और स्मृतियों पर आधारित हैं
- मिताक्षरा परंपरा याज्ञवल्क्य स्मृति से प्रेरित, भारतीय न्याय संहिता को आधुनिक भारत की जरूरतों के अनुरूप बताया
पीटीआई, नई दिल्ली। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि वर्तमान हिंदू कानूनों की मूल आधारशिला स्मृतियां हैं, जो प्राचीन विद्वानों द्वारा कानून, नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था पर लिखी गई व्याख्याओं का संकलन हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू कानून को केवल मनुस्मृति से जोड़कर देखना एक बड़ी गलतफहमी है।
प्राचीन ज्ञान और कानूनी समझ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में मेहता ने कहा कि याज्ञवल्क्य स्मृति, मनु स्मृति, नारद स्मृति और पराशर स्मृति जैसी अनेक स्मृतियों ने हिंदू विधि परंपरा को आकार दिया है।
उन्होंने बताया कि वेद मानव जीवन को प्रकृति और अपने आंतरिक स्वरूप के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीने का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदू कानून की दो प्रमुख परंपराएं—मिताक्षरा और दायभाग—700 ईस्वी से पहले से प्रचलित हैं। मेहता के अनुसार, मिताक्षरा परंपरा विज्ञानेश्वर द्वारा प्रतिपादित की गई थी और यह याज्ञवल्क्य स्मृति पर आधारित है, जबकि बंगाल और असम के तत्कालीन क्षेत्रों में दायभाग परंपरा का प्रभाव अधिक रहा।
उन्होंने कहा कि मिताक्षरा अपेक्षाकृत अधिक उदार और समय के साथ विकसित होने वाली व्यवस्था थी, जिसमें जन्म से ही पैतृक संपत्ति में सह-उत्तराधिकार का अधिकार मान्यता प्राप्त था।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हिंदू धार्मिक और कानूनी ग्रंथों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी व्याख्या में लचीलापन है, जिसने समय के साथ कानूनों को समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होने का अवसर दिया।
उन्होंने कहा कि निकट संबंधियों के बीच विवाह पर रोक जैसी व्यवस्थाएं भी प्राचीन ग्रंथों में निर्धारित थीं और आज भी कानून के माध्यम से लागू हैं।
मेहता ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक ब्रिटिश काल के दंड कानून लागू रहे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने भारतीय न्याय संहिता लागू कर आपराधिक कानूनों को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की जरूरतों के अनुरूप नया स्वरूप दिया।
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