सत्य निकेतन हादसे के बाद अतिरिक्त मंजिलों को सील करने में सरकारी नियमों की अड़चन
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने चार मंजिल से ऊपर के अवैध निर्माण को सील करने का वादा किया, पर दिल्ली स्पेशल प्रोविजन एक्ट और केंद्र के मौजूदा कानून उन इमारतों को संरक्षण देते हैं जो 30 जून 2014 से पहले बने थे, जिससे ध्वस्त करने में कानूनी जटिलता उत्पन्न होती है। एमसीडी ने पिछले तीन महीनों में 960 इमारतें गिराई और 407 को सील किया, फिर भी कोर्ट में जा कर अधिकारी खुद कानूनी कठिनाइयों का सामना करेंगे।

सौजन्य से:- Jagran
सत्य निकेतन हादसा: पांचवीं मंजिलों को सील करने की राह में कानून का रोड़ा, सरकार के ही नियम बनेंगे बाधा
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार के लिए अतिरिक्त मंजिलों को सील करना चुनौतीपूर्ण है। दिल्ली स्पेशल प्रोविजन एक्ट ...और पढ़ें
HighLights
- सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण सील करने की चुनौती।
- दिल्ली स्पेशल प्रोविजन एक्ट सरकारी कार्रवाई में बन रहा बाधा।
- MCD ने तीन माह में 960 इमारतें गिराईं, 407 सील कीं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार ने दावा किया है कि वह चार मंजिल से अतिरिक्त हुए निर्माणों को सील करेगी। लेकिन उसके लिए यह भी करना चुनौती पूर्ण है। क्योंकि संसद और केंद्र सरकार के कानून ही इसमें बाधा बनते हैं।
केंद्र सरकार ने जहां 1500 अनधिकृत कालोनियों को जैसा है वैसे के आधार पर नियमित करने की घोषणा कर दी है। तो ऐसे में किस कानून के तहत इन्हें गिराया जाएगा यह सवाल भी निगम अधिकारियों को चिंता में डाल रहा है।
इतना ही नहीं दिल्ली में अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाला दिल्ली स्पेशल प्रोविजन कानून जिससे तहत 30 जून 2014 तक के हुए अवैध निर्माण को संरक्षण प्राप्त हैं तो उसे कैसे गिराया जाएगा।
दिल्ली में स्पेशल प्रोविजन एक्ट
एमसीडी की निर्माण समिति के चेयरमैन रहे जगदीश ममगांई कहते हैं कि दिल्ली सैदुलाजाब और हौजरानी हादसे के बाद भी सरकार ने यही दावे किए थे। अगर, सरकार कार्रवाई कर सकती है तो अभी तक क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिखावटी बाते हैं क्योंकि दिल्ली में कानून ऐसे हैं जिसमें सरकार के इस दावों को जमीन पर उतारने में दिक्कत होगी। भले ही एजेंसियां दवाब में कार्रवाई कर दें और सील भी कर दें। लेकिन जब यह मामले कोर्ट में जाएंगे तो कार्रवाई करने वाले अधिकारी खुद इसकी जद में आ जाएंगे।
दिल्ली में स्पेशल प्रोविजन एक्ट संसद से पारित हैं जो कि अवैध निर्माण को संरक्षण देता है। अगर, 30 जून 2014 तक का निर्माण है और उसके बाद कोई निर्माण नहीं कर रखा है तो उसे भी सरकार या एमसीडी नहीं गिरा सकती है।
एमसीडी ने दिए कारण बताओ नोटिस
एमसीडी ने सत्य निकेतन की घटना के बाद चार इमारतों को रविवार को ही खतरनाक घोषित कर दिया था। इसमें चार इमारतों में घटना के साथ वाली इमारत पी-13 और 15 के साथ संपत्ति संख्या 81-82 हैं। इन इमारतों को तीन दिन के अंदर संपत्ति मालिक को स्वयं गिराना होगा।
वहीं, सोमवार को भी एमसीडी ने सैदुलाजाब की सात इमारतों पर कार्रवाई की है। इसमें एक इमारत तो ध्वस्त किया गया है जबकि छह इमारतों को अवैध निर्माण पर सीलिंग नोटिस जारी किए गए हैं।
निगम के अनुसार पिछले तीन महीनों में 960 इमारतों को गिराया गया, 407 इमारतों को सील किया गया और 1500 इमारतों को सील करने तथा गिराने के लिए नोटिस जारी किए गए।
यह भी पढ़ें- सत्य निकेतन हादसे के बाद दुकानदारों का कारोबार ठप, रेस्क्यू अभियान के चलते बंद कराई गईं दुकानें
यह भी पढ़ें- पति के लापता होने की खबर से बेखबर थी वंदना, तस्वीर लेकर सत्य निकेतन में रातभर तलाशती रही परमलाल को
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
हरियाणा में 12 सितंबर को ट्रैफिक ई‑चालान निपटाने लोक अदालत, कार‑बाइक मालिकों के लिए अवसर

महराजगंज में अवकाशकालीन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए डीएम‑एसपी ने अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश

लोक अदालत में अधिक मामलों का निपटारा बढ़ाने पर जोर

हमारी नदियों की ज़िन्दगी के लिए एक नया दृष्टिकोण

नदियों की संकट स्थिति: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या दबाव से बढ़ रही चुनौतियाँ

वाराणसी में पेंशनधारकों के लिए 15 दिसंबर को पेंशन अदालत का संचालन

जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या दबाव से नदियों की बिगड़ती स्थिति—इन्हें इंसान मानना बदल सकता है?

नदियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखें: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या का बढ़ता दबाव
ताज़ा ख़बरें
- नदियाँ भी मनुष्य हैं: उनके संकट पर नया दृष्टिकोण
- कुशीनगर में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, बैंक‑ऋण व पारिवारिक विवाद सुलह‑समझौते से सुलझेंगे
- रक्तरंजित धारा: जलवायु‑परिवर्तन, प्रदूषण और जनसंख्या दबाव से नदियों की संकटग्रस्त स्थिति
- विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार हेतु जागरूकता रैली निकाली
- नदियों को मानवीकृत करें? क्या इससे जल संकट में बदलाव आ सकता है?
- नदियों की दुविधा: जलवायु, प्रदूषण और जनसंख्या के साथ संघर्ष
- नदियों के संकट को मानवीय रूप में देखें: क्या इससे बदलाव आएगा?
- सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

